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Ahoi Ashtami Vrat Niyam: पहली बार रखने जा रही हैं अहोई अष्टमी व्रत? जान लें ये जरूरी नियम

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 31, 2026 04:52 pm IST,  Updated : Oct 31, 2026 04:52 pm IST

1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए करती हैं। इस व्रत का पारण चंद्रोदय या तारों को देखने के बाद ही किया जाता है।

अहोई अष्टमी व्रत नियम- India TV Hindi
अहोई अष्टमी व्रत नियम Image Source : FACEBOOK/FREEPIK

हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी आयु, सुखी जीवन और सफलता के लिए निर्जला व्रत करती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है और पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। कुछ लोग अपनी मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देकर भी व्रत खोलते हैं। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा। तो अगर आप भी पहली बार अहोई अष्टमी का व्रत रखने जा रही हैं तो इन नियमों का जरूर पालन करें।

अहोई अष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि का समापन 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। अहोई अष्टमी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से शाम 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

अहोई अष्टमी 2026 के दिन चंद्रोदय और तारों के देखने का समय

अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय रात 11 बजकर 40 मिनट पर होगा। वहीं तारों को देखने के लिए सांझ का समय शाम 6 बजे रहेगा।  बता दें कि करवा चौथ के समान अहोई अष्टमी का व्रत भी काफी कठिन होता है। इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करती हैं। आकाश में तारों का दर्शन करने के बाद ही उपवास का पारण किया जाता है।

अहोई अष्टमी व्रत के दिन इन नियमों का करें पालन

  • अहोई अष्टमी व्रत के दिन सोने से बचें। इस दिन सोने की मनाही होती है।

  • अहोई अष्टमी के दिन काले रंगे के वस्त्र भूलकर भी न पहनें। इस दिन शुभ रंगों के कपड़े ही पहनें।

  • अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को चाकू, कैंची और अन्य धारदार चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

  • चंद्रमा या तारों को देखने के बाद ही जल या अन्न ग्रहण करें।

  • पूजा और पारण के बाद सात्विक भोजन का सेवन ही करें।

  • पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। कथा के बिना व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।

  • अगर दीवार पर चित्र बनाना संभव न हो तो आप बाजार में मिलने वाले अहोई माता के कैलेंडर का भी पूजन कर सकती हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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