अहोई अष्टमी का हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं संतान के उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। साल 2026 में अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है, हालांकि कुछ स्थानों पर चांद को अर्घ्य देकर भी इस व्रत का पारण किया जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि अहोई अष्टमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब रहेगा, तारों का अर्घ्य देने का समय क्या है, कौन सी व्रत कथा का पाठ आपको करना चाहिए।
अहोई अष्टमी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
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पूजा का शुभ मुहूर्त: 05:43 पी एम से 07:00 पी एम(अवधि: लगभग 1 घंटा 18 मिनट)
अहोई अष्टमी 2026: तारों के दर्शन और चंद्रोदय का समय (Moon & Star Rise Time)
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तारों का दर्शन और अर्घ्य देने का समय: 06:07 पी एम और इसके बाद भी तारों को अर्घ्य दिया जा सकता है
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चंद्रोदय का समय: 11:42 पी एम पर नई दिल्ली में (भारत के अलग-अलग राज्यों के अनुसार चंद्रोदय का समय अलग हो सकता है)
अहोई अष्टमी पूजा विधि (Ahoi Ashtami Puja Vidhi)
अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली माताओं को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प आपको लेना चाहिए। दिन भर व्रत का पालन कर शाम के समय पूजा की तैयारी करनी चाहिए। पूजा के लिए पूजा स्थल पर चौकी रखें और उसपर लाल कपड़ा बिछाएं। चौकी पर अहोई माता की तस्वीर स्थापित करें, धूप-दीप जलाएं और अक्षत, रोली, फूल, माला आदि माता को अर्पित करें। भोग के रूप में माता को मिठाई और फल आपको अर्पित करने चाहिए। अहोई अष्टमी की व्रत कथा का पाठ करें और अंत में माता अहोई की आरती करें। इसके बाद तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।
अहोई माता किस का रूप हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता को देवी पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है। इनको स्याहु माता के नाम से भी कई स्थानों पर पुकारा जाता है। अहोई माता की पूजा करने से संतान की सुरक्षा होती है और साथ ही पारिवारिक जीवन में भी सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।