1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. अहोई अष्टमी पर कैसे करें अहोई माता की पूजा? जानें सही पूजन विधि और तारों को अर्घ्य देने का तरीका

अहोई अष्टमी पर कैसे करें अहोई माता की पूजा? जानें सही पूजन विधि और तारों को अर्घ्य देने का तरीका

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 30, 2026 05:43 pm IST,  Updated : Oct 30, 2026 05:43 pm IST

अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। अहोई अष्टमी पर अहोई माता की पूजा और तारों को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। जानिए अहोई अष्टमी की पूजा कैसे की जाती है।

Ahoi Ashtami puja vidhi- India TV Hindi
अहोई अष्टमी की पूजा कैसे की जाती है Image Source : INDIA TV

अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। साल 2026 में यह पर्व रविवार, 1 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और पूरे दिन व्रत रखकर संतान के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती हैं। शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। ऐसे में अगर आप भी अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली हैं, तो यहां जानिए पूजा की सही विधि, जरूरी सामग्री और तारों को अर्घ्य देने का तरीका।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा और तारों के दर्शन का समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है।

अहोई अष्टमी पूजा विधि

  • अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। 
  • इसके बाद पूजा घर में संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखने का संकल्प लें। 
  • शाम की पूजा के लिए घर की साफ जगह पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। 
  • अब चौकी पर अहोई माता का चित्र स्थापित करें। कुछ घरों में दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाकर पूजा करने की भी परंपरा है।
  • अहोई माता को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाएं। 
  • देवी को फल, मिठाई और प्रसाद चढ़ाएं। कुछ परिवारों में दूध-चावल और गेहूं चढ़ाने की परंपरा भी है। 
  • पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में माता की आरती करें।

तारों को अर्घ्य दें

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने की खास परंपरा है। शाम को तारे दिखाई देने पर एक लोटे में जल लें और तारों की ओर मुख करके अर्घ्य दें। इस दौरान अहोई माता का स्मरण करें और संतान के स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना करें।

कैसे खोलें व्रत?

पूजा और तारों को अर्घ्य देने के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें। कुछ स्थानों पर चंद्रमा को देखकर व्रत खोलने की परंपरा भी प्रचलित है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: धनतेरस पर भूलकर भी घर में न लाएं ये 4 चीजें! नहीं माना जाता शुभ, शॉपिंग पर निकलने से पहले देख लें लिस्ट!

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म।