1. Hindi News
  2. धर्म
  3. बड़ा करने के चक्कर में बार-बार बदलते हैं करियर? सिर्फ काम से बोरियत नहीं, कुंडली के ये ग्रह भी हो सकते हैं वजह!

बड़ा करने के चक्कर में बार-बार बदलते हैं करियर? सिर्फ काम से बोरियत नहीं, कुंडली के ये ग्रह भी हो सकते हैं वजह!

कुछ लोग कुछ बड़ा करने के चक्कर में बार-बार अपनी नौकरी या काम बदलते हैं। करियर में स्थिरता के लिए ज्योतिष में कुंडली के कर्म भाव और कुछ ग्रहों को महत्वपूर्ण माना गया है। जिनकी स्थिति असंतोष या नए विकल्प तलाशने की प्रवृत्ति से जोड़ी जाती है।

Career Instability Astrological Reasons- India TV Hindi
Image Source : PEXELS/PINTEREST करियर के रास्ते पर ग्रहों का प्रभाव

कुछ लोग एक ही करियर में लंबे समय तक मेहनत करते हुए धीरे-धीरे सफलता की ओर बढ़ते हैं, जबकि कुछ बार-बार अपना पेशा बदल लेते हैं। ज्योतिष के अनुसार, इसके पीछे व्यक्ति की कुंडली में मौजूद कुछ ग्रह और भाव भी भूमिका निभा सकते हैं। अगर आपका भी किसी एक काम में मन नहीं नहीं टिकता? बार-बार जॉब या प्रोफेशन बदलते हैं, तो चलिए जानते हैं इसके पीछे कुंडली के कुछ ग्रह जिम्मेदार हो सकते हैं।  

कर्म भाव से जुड़ा है करियर

ज्योतिषियों के अनुसार, व्यक्ति की आजीविका और करियर से जुड़े मामलों को कुंडली के दशम भाव यानी कर्म भाव से देखा जाता है। वहीं, दशम भाव के स्वामी और मन के कारक माने जाने वाले चंद्रमा की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। इनसे जुड़े कुछ विशेष योग व्यक्ति के करियर में स्थिरता या बदलाव की प्रवृत्ति से जोड़े जाते हैं।

कर्म भाव पर द्विस्वभाव राशियों का प्रभाव

ज्योतिषीय मान्यताओं में मिथुन, कन्या, धनु और मीन को द्विस्वभाव राशियां माना गया है। अगर दशम भाव पर इन राशियों का प्रभाव हो, तो व्यक्ति के मन में एक ही काम को लंबे समय तक करते रहने को लेकर असमंजस रह सकता है। वह अलग-अलग विकल्पों पर विचार करता रहता है और प्रोफेशन बदलने की इच्छा भी हो सकती है।

राहु-केतु से बढ़ सकता है भ्रम

कुंडली में कर्म भाव पर राहु या केतु की दृष्टि होने को भी करियर में भटकाव से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार, ऐसी स्थिति में व्यक्ति नए-नए रास्तों की ओर आकर्षित हो सकता है। बार-बार कुछ अलग करने की चाह के कारण वह मौजूदा काम छोड़कर दूसरी दिशा चुनने का विचार कर सकता है।

चंद्रमा की स्थिति भी अहम

चंद्रमा को ज्योतिष में मन और भावनाओं का कारक माना गया है। अगर कुंडली में चंद्रमा पीड़ित स्थिति में हो, तो निर्णय लेने में अस्थिरता और बेचैनी से जोड़ा जाता है। ऐसे में काम का थोड़ा दबाव या तनाव भी व्यक्ति के मन में करियर बदलने का विचार पैदा कर सकता है।

छठे-बारहवें भाव का संबंध

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अगर दशम भाव के स्वामी का संबंध छठे या बारहवें भाव से बनता है, तो व्यक्ति के करियर में असंतोष की स्थिति बन सकती है। इसके चलते उसे वर्तमान काम में मन न लगने और बदलाव की इच्छा महसूस होने की बात कही जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: नमक गिरना क्यों माना जाता है अशुभ, क्या सच में किसी बड़े संकट का होता है संकेत? जानें वास्तु और ज्योतिष मान्यताएं