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Astrology Tips: आपका व्यवहार ही बदल सकता है भविष्य, मिलेगा हर काम में मिलेगा शुभ परिणाम, जानिए रुष्ट ग्रहों को प्रसन्न करने का सरल मंत्र!

Navgrah Shanti Secret: ग्रहों के प्रतिनिधि हमारे आसपास ही मौजूद होते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार, व्यक्ति का व्यवहार उसे शुभ प्रभावों की प्राप्ति में सहायक हो सकता है। अगर हम कुछ चीजों का ध्यान रखें तो रुष्ट ग्रह भी शांत होकर शुभ फल देने लगते हैं।

Navgrah Shanti Secret- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK जानिए रुष्ट ग्रहों को प्रसन्न करने का सरल मंत्र!

Navgrah Shanti Secret: कई बार हमारे जीवन में परेशानियां खत्म होने का नाम ही नहीं लेती है, लाख जतन करने के बाद भी कहीं से कोई राहत मिलती नजर नहीं आती है। ऐसे में अक्सर ग्रहों की शांति के लिए ज्योतिष शास्त्र में पूजा, यज्ञ, मंत्र-जाप और रत्न धारण की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल आपका आचरण और व्यवहार भी रुष्ट ग्रहों को शांत कर सकता है? शास्त्रों के अनुसार, जैसे कर्म किया जाता है, वैसा ही फल मिलता है। इसलिए अगर जीवन में ग्रहों का अशुभ प्रभाव दिखाई दे रहा हो, तो सबसे पहले अपने व्यवहार और संबंधों को सुधारना जरूरी है। जानिए कैसे आपके व्यवहार से मिलेगा शुभ प्रभाव। 

कर्म और ग्रहों का गहरा संबंध

हम सभी जानते हैं कि कर्म कभी नष्ट नहीं होता, उसका केवल रूप बदलता है। विज्ञान भी मानता है कि पदार्थ नष्ट नहीं होता, केवल परिवर्तित होता है। उसी तरह हमारे कर्म भी समय आने पर सुख-दुख के रूप में फल देते हैं। ज्योतिष के अनुसार, पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण ही कई बार ग्रह रुष्ट हो जाते हैं।

शास्त्रों का सरल संदेश

धर्मशास्त्रों में सफलता के सूत्र संकेत रूप में दिए गए हैं मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, गुरु देवो भव, अतिथि देवो भव। मात्र प्रणाम करने, सदाचार अपनाने और वृद्धों की सेवा करने से आयु, विद्या, यश और बल में वृद्धि होती है। जीवों के प्रति परोपकार की भावना रखने से कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम हो सकता है।

ग्रहों के प्रतिनिधि हमारे आसपास ही हैं

शास्त्रों के अनुसार, अगर ग्रहों के प्रतिनिधि लोगों से संबंध खराब हों, तो पूजा-पाठ भी निष्फल हो सकते हैं। लेकिन अगर प्रेम, आदर और सत्कार का भाव रखा जाए, तो ग्रह स्वयं शांत होकर शुभ परिणाम देने लगते हैं। इसलिए ग्रहों की शांति का सबसे सरल उपाय अपना आचरण सुधारना और दूसरों के संबंधों को मजबूत बनाना है। नवग्रह इस संसार के हर तत्व में अपना प्रतिनिधित्व रखते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि सूर्य पिता का, चंद्रमा माता का, मंगल छोटे भाई-बहनों का, बुध मामा का, बृहस्पति गुरु और बड़े भाई का, शुक्र जीवनसाथी का और शनि सेवक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। राहु अंगहीन और केतु दीन-हीन व रोगी लोगों से जुड़ा माना गया है।

किस ग्रह को कैसे करें शांत?

  1. अगर सूर्य रुष्ट है तो सूर्य ग्रह की कृपा पाने के लिए अपने पिता का सम्मान करें। 
  2. चंद्रमा पीड़ादायक हो तो अपनी माता या माता समान स्त्रियों को प्रसन्न रखें। 
  3. मंगल ग्रह के कष्ट में छोटे भाई-बहनों का साथ दें। 
  4. बुध के लिए अपने मामा और बंधुओं का आदर करें। 
  5. देव गुरु बृहस्पति के लिए गुरुजन और वृद्धों की सेवा करें। 
  6. शुक्र ग्रह को शांत करने के लिए जीवनसाथी को सम्मान दें। 
  7. शनि के प्रभाव में सेवक या जरूरतमंद की सहायता करें। 
  8. राहु और केतु के लिए दीन-दुखियों और रोगियों की मदद करना श्रेष्ठ माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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