1. Hindi News
  2. धर्म
  3. 29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत, नोट कर लें भद्रा का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त

29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत, नोट कर लें भद्रा का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ का व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है। तो ऐसे में यहां जानिए करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और भद्रा काल के समय के बारे में।

करवा चौथ 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV करवा चौथ 2026

करवा चौथ का व्रत सुहागिनों का प्रमुख त्यौहार माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। करवा चौथ व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद चांद को देखने के बाद ही किया जाता है। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस साल यह पावन दिन 29 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है। इसी दिन सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी। करवा चौथ के दिन करवा माता, भगवान शिव, मां पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। तो चलिए अब जानते हैं करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और भद्रा काल के समय के बारे में।

करवा चौथ व्रत 2026 पूजा शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 29 अक्टूबर को मध्यरात्रि 1 बजे से होगा। चतुर्थी तिथि का समापन 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा। करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट  तक रहेगा।  वहीं करवा चौथ व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

करवा चौथ 2026 के दिन चांद निकलने का समय

करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। बिना चांद की पूजा और दर्शन के यह व्रत पूरा नहीं माना जाता है। करवा चौथ के दिन चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 17 मिनट रहेगा। हालांकि शहर के अनुसार चंद्रोदय का समय अलग-अलग हो सकता है।

करवा चौथ 2026 के दिन भद्रा कितने बजे तक रहेगा?

भद्रा काल 28 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 31 मिनट से आरंभ होगा और समाप्त 29 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ऐसे में करवा चौथ के दिन पूजा के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं होगा। वहीं व्रती महिलाएं भद्रा समाप्त होने के बाद सरगी भी कर सकती हैं।

करवा चौथ पूजा सामग्री लिस्ट

करवा और ढक्कन (मिट्टी या तांबा), छलनी, कांस की तीलियां, पानी का लोटा, मिठाई, दीपक, मिट्टी की पांच डेलियां, सिंदूर, अक्षत, रोली, मौल, कुमकुम, देसी घी,चावल, फूल, फल, चंदन, सुहाग का सामान (16 श्रृंगार का सामान), पका हुआ भोजन, हलवा, आठ पूरियों की अठावरी, कच्चा दूध, नारियल, पान, व्रत कथा की किताब, करवा माता की तस्वीर, ड्राई फ्रूट्स, कपूर, रूई की बाती, अगरबत्ती-धूप, हल्दी, दही, इत्यादि।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

31 अक्टूबर को गुरु-केतु की युति से बनेगा गणेश योग, इन 5 भाग्यशाली राशियों को राजयोग जैसा सुख मिलने के प्रबल योग