Kedarnath Dham Yatra 2026 Date: केदारनाथ मंदिर से करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाते हैं। काफी कठिन यात्रा के बाद भक्तगण बाबा केदार के द्वार पर पहुंचते हैं। केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचाई पर स्थित ज्योतिर्लिंग है। यह पावन धाम उत्तराखंड के 'छोटा चारधाम' यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अन्य तीन धाम में बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री आता है। केदारनाथ मंदिर शीतकाल में बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान केदारनाथ धाम की यात्रा नहीं होती है। 6 महीने बाद दोबारा भक्तों के लिए केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं। तो अब केदारनाथ के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे भक्तों का इंतजार समाप्त होने वाला है, क्योंकि जल्द ही केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने वाले हैं। फिर इसी के साथ केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो जाएगा।
2026 में बाबा केदारनाथ के कपाट कब खुलेंगे?
इस साल केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल 2026 को खुलेंगे। भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली अपने शीतकालीन निवास ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ से पैदल मार्ग द्वारा धाम तक पहुंचती है। 22 अप्रैल को सुबह के समय वैदिक मंत्रोच्चार के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। पिछले साल यानी 2025 में 2 मई को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले थे। छह महीने तक दर्शन-पूजन के बार 23 अक्टूबर 2025 को मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केदारनाथ धाम आने वाले भक्तों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
आपको बता दें कि जब केदारनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं तब बाबा केदार की गद्दी अगले छह महीने के लिए ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ) में विराजमान होती है। बाबा केदार का पूजा स्थल यही बन जाता है। भगवान केदारनाथ की डोली पांच मुख वाली होती है। इस डोली के अंदर बाबा केदार की चांदी की भोग मूर्ति विराजमान होती है। बाबा केदार की भोग मूर्ति को इसी पांचमुखी वाली डोली में शीतकालीन गद्दीस्थल लाया जाता है। फिर कपाट खोलने के समय बाबा केदार की भोगमूर्ति को इसी डोली में केदारनाथ ले जाया जाता है। इस मूर्ति की पूजा छह माह तक केदारनाथ तो छह माह तक शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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