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कुंडली के पंचम भाव से पूर्वजन्म के साथ ही संतान और प्रेम जीवन के भी खुलते हैं राज, जानें देखने का तरीका

कुंडली के पंचम भाव से पूर्वजन्म, संतान और शिक्षा के बारे में हमको पता चलता है। आज हम आपको अपने इस लेख में पंचम भाव के बारे में ही विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।

Kundli Ka Panchvan Bhav- India TV Hindi
Image Source : CANVA कुंडली का पांचवां भाव

कुंडली के पंचम भाव को ज्योतिष शास्त्र में बेहद अहम माना जाता है। यह भाव आपके पूर्वजन्म के बारे में भी जानकारी देता है और साथ ही आपके प्रेम संबंधों के बारे में भी बताता है। इसके साथ ही इस भाव से संतान, आपकी प्रारंभिक शिक्षा और आपकी भावनाओं के बारे में भी जानकारी मिलती है। क्योंकि यह भाव पूर्वजन्म से जुड़ा माना गया है इसलिए आपके पाप-पुण्यों के बारे में भी यही भाव जानकारी देता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं इस भाव को कैसे देखना चाहिए। 

कुंडली का पंचम भाव 

कुंडली का पंचम भाव कौन सा होता है आप ऊपर दी गई तस्वीर में देख सकते हैं। इस भाव में नंबर 1 से 12 तक कोई भी हो पंचम भाव यही कहलाएगा।  

कुंडली के पंचम भाव से जानें प्रेम जीवन कैसा होगा

पंचम भाव प्रेम का कारक भाव है इसलिए प्रेम जीवन की जानकारी इस भाव से ही चलती है। अगर इस भाव का स्वामी शुभ स्थिति में है और किसी पाप ग्रह (शनि, मंगल, राहु-केतु) की इस पर दृष्टि नहीं है और ये त्रिक भावों में नहीं बैठा है तो प्रेम जीवन में बेहद सुखद परिणाम व्यक्ति को मिल सकते हैं। वहीं पंचमेश अगर बुरी स्थिति में हो तो प्रेम जीवन में दिक्कतों का सामना व्यक्ति को करना पड़ सकता है। इसके साथ ही पंचम भाव के कारक ग्रह गुरु की स्थिति को देखना भी जरूरी होता है। अगर गुरु कुंडली में शुभ है तो प्रेम जीवन में संतुलन रहेगा और गुरु बुरी स्थिति में है तो उतार-चढ़ाव प्रेम जीवन में आ सकते हैं।  

कुंडली के पंचम भाव से पूर्वजन्म के कर्मों का पता

अगर कुंडली के पंचम भाव का स्वामी कोई शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, चंद्रमा, बुध) है तो समझ लीजिए पिछले जन्म में आपने अच्छे कर्म किए हैं। वहीं इस भाव का स्वामी स्वराशि, उच्च राशि या मित्र राशि में हो तो पिछले जन्मों में किए गए शुभ कार्यों का फल आपको इस जन्म में मिल सकता है। पंचम भाव के स्वामी अगर क्रूर ग्रह (शनि, मंगल, सूर्य) हों तो पिछले जन्म में आपने कुछ गलत कार्य भी अवश्य किए होंगे। हालांकि पंचम भाव का स्वामी अगर क्रूर ग्रह हो लेकिन कुंडली में शुभ अवस्था में हों तो अच्छे कर्मों की ओर इशारा करता है। इसके साथ ही पंचम भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि पिछले जन्मों के पाप कर्मों को दर्शाती है और शुभ ग्रहों की दृष्टि शुभ कर्मों को। 

कुंडली के पंचम भाव से शिक्षा जीवन का पता 

पंचम भाव के स्वामी की स्थिति अगर कुंडली में शुभ है भले पंचमेश क्रूर ग्रह हो या शुभ तो शिक्षा क्षेत्र में शुभ फल व्यक्ति को मिल सकते हैं। वहीं पंचम भाव का स्वामी भले ही शुभ ग्रह हो लेकिन कुंडली में अशुभ अवस्था में हो तो शिक्षा क्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

कुंडली के पंचम भाव से संतान सुख का पता 

इस भाव में बैठे ग्रह और इस भाव पर जिन ग्रहों की दृष्टि पड़ रही है उनकी दशा, अंतर्दशा में अक्सर व्यक्ति को संतान की प्राप्ति होती है। शुभ ग्रह पंचम भाव के स्वामी हों और शुभ ग्रहों की दृष्टि अगर इस भाव पर हो तो बच्चा अच्छे आचरण वाला हो सकता है वहीं क्रूर ग्रहों की दृष्टि बच्चे के जीवन पर भी अच्छे-बुरे प्रभाव डाल सकती है। पंचमेश अगर अस्त हो, पंचमेश पर शनि, राहु-केतु की दृष्टि हो तो संतान प्राप्ति में देरी हो सकती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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