1. Hindi News
  2. धर्म
  3. कुंडली के 4 ग्रह योग बनते हैं पितृ दोष का कारण, कहीं आपकी जन्म पत्रिका में भी तो नहीं मौजूद?

कुंडली के 4 ग्रह योग बनते हैं पितृ दोष का कारण, कहीं आपकी जन्म पत्रिका में भी तो नहीं मौजूद?

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 15, 2026 08:18 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 08:18 pm IST

कुंडली में मौजूद पितृदोष कई परेशानियों कारण व्यक्ति के लिए बन सकता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कुंडली देखकर आप कैसे जान सकते हैं कि आप पितृदोष से पीड़ित हैं या नहीं।

Pitru Dosh- India TV Hindi
पितृदोष Image Source : PINTEREST

पितृदोष को वैदिक ज्योतिष में कई परेशानियों का कारण माना जाता है। इस दोष के चलते बने-बनाए काम बिगड़ सकते हैं, पारिवारिक जीवन में परेशानियां पैदा हो सकती हैं साथ ही वंश वृद्धि में भी दिक्कतें व्यक्ति को आ सकती हैं। यह दोष करियर और आर्थिक पक्ष के लिए भी अच्छा नहीं माना जाता है। कई लोगों की कुंडली में यह दोष देखने को मिलता है और इसलिए ऐसे लोगों को पितृदोष से मुक्त होने के उपाय भी अवश्य करने चाहिए। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि पितृदोष कुंडली में किन ग्रह स्थितियों में बनता है। 

कुंडली में सूर्य और राहु की युति 

सूर्य को वैदिक ज्योतिष में भाग्य, पिता और पूर्वजों का कारक भी माना गया है। ऐसे में अगर कुंडली में सूर्य क्रूर ग्रह राहु के साथ विराजमान हैं तो इसे पितृदोष का कारण माना जाता है। सूर्य-राहु की युति ग्रहण दोष और पितृदोष दोनों ही बनाती है। जिन लोगों की कुंडली में ऐसी ग्रह स्थिति है उन्हें पितरों को प्रसन्न करने के लिए पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण आदि अवश्य करने चाहिए। इसके साथ ही पितृपक्ष, सूर्य ग्रहण, संक्रांति, अमावस्या और पूर्णिमा के दिन ऐसे लोगों को दान करना चाहिए। 

चंद्रमा की केतु के साथ युति 

अगर चंद्रमा कुंडली में केतु के साथ युति में हों तो इस ग्रह स्थिति को भी पितृदोष का कारण माना जाता है। चंद्रमा माता के साथ ही स्त्री पक्ष को दिखाते हैं इसलिए चंद्र-केतु की युति मातृ पितरों की अप्रसन्नता को दिखाती है। ऐसे में चंद्र-केतु की युति जिन लोगों की कुंडली में हो उन्हें अपने पितरों को खुश करने के लिए महिलाओं का सम्मान करना चाहिए और साथ ही पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण आदि करने चाहिए। पितृपक्ष के दौरान नवमी तिथि (मातृ नवमी) के दिन श्राद्ध करने से ऐसे लोग मातृ पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं और पितृदोष से मुक्ति हो सकते हैं। वहीं अमावस्या का श्राद्ध करने से सभी भूले-बिसरे पितरों का आशीर्वाद पा सकते हैं।

नवम और पंचम भाव की स्थिति 

ज्योतिष शास्त्र में पंचम भाव को पूर्वजन्म का कारक माना जाता है वहीं नवम भाव को पिता, भाग्य आदि का कारक माना जाता है। ऐसे में पंचम और नवम भावों की स्थिति अच्छी न हो यानि इनके कारक ग्रह 6, 8, 12 भाव में हों या शनि, राहु, केतु, मंगल जैसे ग्रह इन भावों में हों तो पितृ दोष का बुरा प्रभाव आपके जीवन पर हो सकता है। ऐसी स्थिति में भी व्यक्ति को पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध और दान-पुण्य करना चाहिए। साथ ही बड़े-बुजुर्गों का हमेशा सम्मान करना चाहिए। 

सूर्य का पापी ग्रहों के प्रभाव में होना 

कुंडली में भले ही सूर्य, राहु के साथ न हो लेकिन शनि, मंगल, केतु का भी अगर बुरा प्रभाव इनपर है तो इसे भी पितृदोष का कारण माना जाता है। ऐसी स्थिति में भी व्यक्ति को अपने पितरों को शांत करने के लिए पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध-तर्पण आदि करने चाहिए। साल 2026 में पितृपक्ष 26 तारीख से हैं अगर आपकी कुंडली में भी ऊपर बताई गई कोई भी ग्रह स्थिति है तो पितृपक्ष के दौरान पितरों की शांति के लिए और पितृदोष से मुक्ति के लिए पूजन, दान, श्राद्ध आदि आपको अवश्य करने चाहिए। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

चाणक्य नीति के अनुसार, विद्याहीन गुरु के साथ ही इन 4 से तुरंत बना लेनी चाहिए दूरी; वरना जीवन में हमेशा रहेंगे दुखी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।