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इस साल ललिता सप्तमी कब मनाई जाएगी? नोट कर लें सटीक डेट, मुहूर्त और पूजा विधि

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 15, 2026 06:25 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 06:27 pm IST

हर साल ललिता सप्तमी राधा अष्टमी से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन देवी ललिता के साथ भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा का विधान है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व बताया गया है। तो यहां जानिए ललिता सप्तमी की डेट, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

ललिता सप्तमी 2026- India TV Hindi
ललिता सप्तमी 2026 Image Source : INDIA TV

हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ललित सप्तमी का पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन राधा रानी और कान्हा जी की प्रिय सखी श्री ललिता देवी का  प्राकट्य हुआ था। ब्रज क्षेत्र और वैष्णव संप्रदाय में ललिता देवी की जयंती पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन रखने और ललिता देवी के साथ राधा-कृष्ण जी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो चलिए जानते हैं कि इस साल ललिता सप्तमी कब मनाई जाएगी और पूजा शुभ मुहूर्त, विधि क्या रहेगा।

ललिता सप्तमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से होगा। सप्तमी तिथि का समापन 18 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 2 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, ललिता सप्तमी का पर्व 18 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

ललिता सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त

ललिता सप्तमी के दिन पूजा के लिए प्रातःकाल शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 7 मिनट से दोपहर 1 बजे तक सप्तमी तिथि समाप्त होने से पहले तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12  बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। प्रातः संध्या मुहूर्त सुबह 5 बजकर 16 मिनट से सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।

ललिता सप्तमी पूजा विधि

  • ललिता सप्तमी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद साफ वस्त्र पहन लें। इस दिन पीले या गुलाबी जैसे शुभ के कपड़े ही पहनें।
  • इसके बाद पूजा स्थल या मंदिर की सफाई कर लें और हर तरफ गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। 
  • अब एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। 
  • इसके बाद चौकी पर राधा-कृष्ण और ललिता देवी का चित्र स्थापित करें।
  • फिर घी वाला दीप और धूप जलाएं और ललिता देवी समेत राधा-कृष्ण का ध्यान करें।  
  • ललिता देवी और राधा-कृष्ण की प्रतिमा को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं।
  • इसके बाद चंदन, कुमकुम, रोली, और हल्दी से तिलक करें। राधा रानी और ललिता देवी को लाल चुनरी या वस्त्र अर्पित करें।
  •  फूल, तुलसी पत्र और माखन-मिश्री, खीर और मिठाई का भोग लगाएं।
  • अंत में भगवान कृष्ण और राधा रानी की आरती उतारें और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

ललिता सप्तमी का महत्व

ललिता सप्तमी का व्रत रखकर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन सदैव सुखमय और मधुर बना रहता है। इसके साथ ही कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी भी प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि ललिता सप्तमी का व्रत करने से संतान के जीवन में आ रही सारी बाधाएं भी शीघ्र दूर हो जाती हैं। बता दें कि हर साल ललिता सप्तमी राधा अष्टमी से एक दिन पहले मनाया जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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