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16 सितंबर 2026 का पंचांग: बुधवार को रहेगा वैधृति योग और विशाखा नक्षत्र, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

 Written By: Acharya Indu Prakash,  Edited By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 15, 2026 04:27 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 04:27 pm IST

बुधवार को पंचमी तिथि सुबह 9 बजे तक रहेगी, उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। तो आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए 16 सितंबर 2026 का पंचांग और राहुकाल का समय।

बुधवार का दैनिक पंचांग- India TV Hindi
बुधवार का दैनिक पंचांग Image Source : INDIA TV

16 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और बुधवार का दिन है। पंचमी तिथि बुधवार को सुबह 9 बजे तक रहेगी , उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। 16 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। वैधृति योग स्थिर कार्यों हेतु ठीक है लेकिन अगर कोई भाग-दौड़ वाला कार्य अथवा यात्रा आदि करनी हो तो इस योग में नहीं करनी चाहिए। साथ ही बुधवार को शाम 5 बजकर 23 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए बुधवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

16 सितंबर 2026 का पंचांग

  • भाद्रप भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि- 16 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे तक रहेगी , उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी
  • वैधृति योग- 16 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक 
  • विशाखा नक्षत्र- 16 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 23 मिनट तक

16 सितंबर 2026 शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:52 ए एम से 05:39 ए एम
  • प्रातः संध्या- 05:16 ए एम से 06:26 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
  • विजय मुहूर्त- 02:36 पी एम से 03:24 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:40 पी एम से 07:04 पी एम
  • सायाह्न संध्या- 06:40 पी एम से 07:51 पी एम
  • अमृत काल- 07:50 ए एम से 09:34 ए एम
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
  • अमृत सिद्धि योग - 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
  • रवि योग- 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर  

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- दोपहर 12:16 - 01:48 PM
  • मुंबई- दोपहर 12:33 - 02:05 PM
  • चंडीगढ़- दोपहर 12:17 - 01:50 PM
  • लखनऊ- दोपहर 12:01 - 01:33 PM
  • भोपाल- दोपहर 12:15 - 01:47 PM
  • कोलकाता- दोपहर पहले 11:31 - 01:03 PM
  • अहमदाबाद- दोपहर 12:34 - 02:06 PM
  • चेन्नई- दोपहर 12:04 - 01:35 PM 

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 

  • सूर्योदय- सुबह 06:06 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 06:24 बजे

विशाखा नक्षत्र 

आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से विशाखा 16वां नक्षत्र है। विशाखा का अर्थ होता है- विभाजित या एक से अधिक शाखाओं वाला। विवाह आदि के समय सजाये गए घर के द्वार को विशाखा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इसके तीन चरण तुला राशि में आते हैं और इसका चौथा चरण वृश्चिक राशि में आता है। लिहाजा तुला और वृश्चिक राशि के जातकों पर विशाखा नक्षत्र का प्रभाव रहता है। विशाखा नक्षत्र को शक्ति, समृद्धि, सुंदरता, उपलब्धियों और खुशियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। इस नक्षत्र में कारीगरी, चित्रकारी और औषधी से सबंधित कार्य आरंभ करना शुभ माना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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