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चाणक्य नीति के अनुसार, विद्याहीन गुरु के साथ ही इन 4 से तुरंत बना लेनी चाहिए दूरी; वरना जीवन में हमेशा रहेंगे दुखी

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 15, 2026 03:49 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 03:49 pm IST

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के जरिए जीवन को सार्थक बनाने के कई सूत्र दिए हैं। आज हम आपको चाणक्य नीति के जरिए बताएंगे कि किनको त्याग देना व्यक्ति के लिए फायदे का सौदा हो सकता है।

Chanakya Niti- India TV Hindi
चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र के जरिए जीवन के हर पहलू को छुआ है। अर्थ और राजनीति शास्त्र के साथ ही चाणक्य ने सामाजिक और निजी संबंधों पर भी नीति शास्त्र में ज्ञान दिया था। नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्य ने कुछ रिश्तों और धर्म के बारे में बताया है जिनको त्याग देना ही सही होता है। आज इसी के विषय में हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं। 

इनको त्याग देना ही फायदे का सौदा 

त्यजेद्धर्म दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत्।

त्यजेत्क्रोधमुखी भार्या नि:स्नेहान्बान्धवांस्यजेत्। 

ऊपर चाणक्य नीति के चौथे अध्याय का सौलहवां श्लोक दिया गया है। इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य 4 को त्यागने के बारे में बता रहे हैं- 

पहला- दयाहीन धर्म 

चाणक्य कहते हैं कि जिस धर्म में दया का भाव न हो उसे त्याग देना चाहिए। दयाहीन धर्म का पालन करके व्यक्ति गलत दिशा में ही जाता है और धीरे-धीरे उसकी आत्मा का भी पतन होने लगता है। 

दूसरा- विद्याहीन गुरु 

यह स्वाभाविक सी बात है कि जिस गुरु को खुद ज्ञान न हो वो शिष्य को क्या ही सिखाएगा। इसलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं ऐसे गुरु से दूरी बना लेनी चाहिए जो ज्ञानहीन हो। ज्ञानहीन गुरु के साथ शिष्य का रिश्ता शिष्य को अज्ञान के पथ पर ही ले जाता है और शिष्य का जीवन परेशानियों से भर जाता है। 

तीसरा- स्नेहहीन बन्धु-बान्धव 

चाणक्य नीति के अनुसार अगर आपके बन्धु-बान्धव यानि कुटुंब के लोग आपके प्रति स्नेह नहीं रखते तो उनके साथ रिश्ता बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। ऐसे बन्धु-बान्धवों के साथ रिश्ता रखने से समय-समय पर आपको परेशानियों का सामना ही करना पड़ता है इसलिए स्नेहहीन बन्धु-बान्धवों से व्यक्ति को दूरी ही बना लेनी चाहिए। 

चौथा- क्रोधी भार्या यानि पत्नी 

आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति की पत्नी आवश्यकता से अधिक क्रोध करती है, बात-बात पर लड़ती-झगड़ती हो तो ऐसी पत्नी से दूरी बना लेनी चाहिए। क्रोधमुखी भार्या व्यक्ति के जीवन और उसके परिवार को खराब कर सकती है।

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में यह भी बताया है कि किन बातों का ध्यान रखकर आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप इस बारे में भी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट पर इस बारे में विस्तार से आप पढ़ सकते हैं। 

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