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किशाऊ डैम पर अमित शाह ने सुलझाया बड़ा पेंच, 15 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट से 6 राज्यों को कैसे फायदा होगा?

 Reported By: Devendra Parashar,  Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 15, 2026 05:26 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 05:30 pm IST

लंबे समय से अटके किशाऊ डैम प्रोजेक्ट पर 6 राज्यों की सहमति को एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे अंतरराज्यीय जल विवादों को दूर करने के साथ-साथ जल सुरक्षा, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवन की दिशा में भी आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो सकता है।

अमित शाह की अध्यक्षता...- India TV Hindi
अमित शाह की अध्यक्षता में 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने MoU पर किए साइन। Image Source : PTI

लंबे समय से अटके पड़े 'किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट' को मंगलवार को बड़ी गति मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने इस प्रोजेक्ट पर सहमति जताई। यह समझौता शाह की अध्यक्षता में 16 जून को हुई ऐसी ही एक बैठक के लगभग 3 महीने बाद हुआ है, जिसमें 6 राज्यों ने प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी।

हालिया बैठक में ज्यादातर मुख्यमंत्री खुद शामिल हुए। साथ ही इसमें शामिल राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन समेत गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उम्मीद है कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जाएगा।

किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट क्या है?

किशाऊ मल्टीपर्पस डैम प्रोजेक्ट उत्तराखंड में टोंस नदी पर प्रस्तावित एक मल्टीपर्पस (बहु-उद्देशीय) जल भंडारण और जल-विद्युत प्रोजेक्ट है। टोंस नदी, यमुना नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस प्रोजेक्ट का मकसद किशाऊ जलाशय में कई उद्देश्यों के लिए पानी जमा करना है, जिनमें सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन और पीने के पानी की आपूर्ति बढ़ाना शामिल है। इससे यमुना में साफ़ पानी का बहाव बढ़ने और नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में मदद मिलने की भी उम्मीद है।

यह प्रोजेक्ट कई सालों से विचाराधीन है। इसमें छह राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं, क्योंकि इसका पानी के बंटवारे, बिजली उत्पादन और वित्तपोषण पर असर पड़ता है।

15 हजार करोड़ के किशाऊ डैम प्रोजेक्ट पर 6 राज्यों की मुहर।
Image Source : PTI15 हजार करोड़ के किशाऊ डैम प्रोजेक्ट पर 6 राज्यों की मुहर।

प्रोजेक्ट के लिए फंड कैसे मिलेगा?

राज्यों के बीच बनी सहमति के तहत, प्रोजेक्ट के जल घटक (water component) की लागत का 90% हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के तौर पर उठाएगी। बाकी 10% लागत छह राज्यों द्वारा आपस में बांटी जाएगी।

राज्य हिमाचल प्रदेश के पानी के हिस्से से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के तरीके पर भी सहमत हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के आवंटित पानी का हिस्सा दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा, जबकि ये दोनों राज्य प्रोजेक्ट के बिजली उत्पादन वाले हिस्से में हिमाचल प्रदेश के हिस्से की लागत को आपस में बांटेंगे। उम्मीद है कि इस व्यवस्था से शामिल राज्यों के बीच एक मुख्य लंबित मुद्दे को सुलझाने और प्रोजेक्ट को लागू करने का रास्ता साफ करने में मदद मिलेगी।

राज्यों को क्या फायदा होगा?

इस प्रोजेक्ट से कई राज्यों और दिल्ली को अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है। लगभग 15,000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से इन राज्यों को पानी मिलने की उम्मीद है-

  • हरियाणा: 836 क्यूसेक पानी
  • उत्तर प्रदेश: 543.2 क्यूसेक
  • राजस्थान: 163.52 क्यूसेक
  • दिल्ली: 105.28 क्यूसेक

पानी की ज्यादा उपलब्धता और बहाव से उन इलाकों में सिंचाई और पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

यह प्रोजेक्ट यमुना के लिए क्यों जरूरी है?

इस प्रोजेक्ट का एक मुख्य मकसद किशाऊ रिजर्वॉयर से पानी को कंट्रोल करके जमा करने और छोड़ने के ज़रिए यमुना में पानी का बहाव बढ़ाना है। केंद्र और इसमें शामिल राज्यों ने इस प्रोजेक्ट को यमुना को फिर से जीवित करने के बड़े मकसद से जोड़ा है। पानी के अतिरिक्त बहाव से नदी में साफ पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है, साथ ही रिज़र्वॉयर से सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन की ज़रूरतें भी पूरी होंगी।

आगे क्या होगा?

6 राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद, अब इस प्रोजेक्ट के मंज़ूरी के अगले चरण की ओर बढ़ने की उम्मीद है। किशाऊ मल्टीपर्पज़ डैम प्रोजेक्ट को मंज़ूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा, जिसके बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यह नया समझौता इस प्रोजेक्ट से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे अंतर-राज्यीय मुद्दों को सुलझाने और ऐसे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है, जिसका पानी की सुरक्षा, पनबिजली, सिंचाई और यमुना को फिर से जीवित करने पर असर पड़ेगा।

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