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सितंबर में श्राद्ध कब से शुरू होंगे, कितने दिन तक चलेंगे? देखें पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Aug 30, 2026 01:05 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 07:16 pm IST

साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत सितंबर के आखिरी सप्ताह में होगी और अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा। आइए ऐसे में जान लेते हैं पितृपक्ष का पूरा कैलेंडर।

Pitru Paksha 2026- India TV Hindi
पितृपक्ष 2026 Image Source : INDIA TV

सनातन परंपरा में पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों की पूजा की जाती है। पितरों को याद करते हुए इस दौरान श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण, दान आदि करने का विधान है। हर साल भाद्रपद माह में पूर्णिमा तिथि से श्राद्ध प्रारंभ होते हैं और आश्विन माह की अमावस्या तिथि तक चलते हैं। साल 2026 में पितृपक्ष सितंबर के माह में शुरू होंगे और अक्टूबर तक चलेंगे। पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी। आइए ऐसे में जान लेते हैं पितृपक्ष 2026 की तिथियां और पूरा कैलेंडर। 

पितृपक्ष 2026 कैलेंडर

दिनांक   वार     तिथि श्राद्ध
26 सितंबर शनिवार   पूर्णिमा पूर्णिमा श्राद्ध 
27 सितंबर रविवार प्रतिपदा प्रतिपदा श्राद्ध 
28 सितंबर सोमवार द्वितीया द्विताया श्राद्ध
29 सितंबर मंगलवार तृतीया तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर बुधवार चतुर्थी चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर गुरुवार षष्ठी षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर शुक्रवार सप्तमी सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर शनिवार अष्टमी  अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर रविवार नवमी नवमी श्राद्ध 
5 अक्टूबर सोमवार दशमी  दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर मंगलवार एकादशी एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर बुधवार द्वादशी द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर गुरुवार त्रयोदशी त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर शुक्रवार चतुर्दशी चतुर्दशी श्राद्ध 
10 अक्टूबर शनिवार अमावस्या सर्व पितृ श्राद्ध

पितरों का श्राद्ध किस दिन करना चाहिए?

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार आपके पूर्वजों का श्राद्ध जिस भी तिथि को हुआ है उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए। यानि प्रतिपदा को मृत्यु हुई है तो प्रतिपदा के दिन, द्वितीया को हुई है तो द्वितीया के दिन और इसी तरह तिथि के अनुसार ही श्राद्ध किया जाना सही माना जाता है। वहीं मातृ पितरों को प्रसन्न करने के लिए नवमी का श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। इसलिए नवमी तिथि को मातृ नवमी के नाम से भी जाना जााता है।  जिन लोगों की मृत्यु की तारीख ज्ञात न हो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध करने से आपके सभी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा आपको बता दें कि साल 2026 में चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 30 सितंबर को है। इसलिए जिन लोगों के पितृ की मृत्यु चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुई है उन्हें 30 सितंबर को ही श्राद्ध करना चाहिए। 

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