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₹2000 तक UPI रहेगा फ्री, उसके ऊपर लगेगा चार्ज; NPCI ने जारी किया नया MDR फ्रेमवर्क, जानें पूरी डिटेल

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Sep 15, 2026 07:09 pm IST,  Updated : Sep 15, 2026 07:45 pm IST

नए फ्रेमवर्क में छोटे दुकानदारों और Tier-3 बाजारों में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने के लिए एक अलग फंड भी बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

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बड़े पेमेंट पर लगेगा चार्ज Image Source : ANI

UPI से पेमेंट करने वालें देश के करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। रोजमर्रा की छोटी खरीदारी पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर चार्ज लगेगा। NPCI ने UPI के लिए संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क जारी किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M यानी मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा। खास बात यह है कि आम यूजर्स के लिए UPI अभी भी बड़े पैमाने पर फ्री रहेगा और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन पर किसी भी राशि के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR फ्रेमवर्क

नया UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में बदलाव कर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के लिए शुल्क से जुड़ा कानूनी आधार तैयार किया है। इसके बाद 14 सितंबर को ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर जीरो MDR की अधिसूचना जारी की गई।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं

नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा छोटे पेमेंट करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों को मिलेगा। ₹2,000 तक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य रहेगा। NPCI के मुताबिक, UPI के 95 प्रतिशत से ज्यादा P2M ट्रांजैक्शन इसी सीमा के अंदर आते हैं। यानी ज्यादातर छोटे UPI पेमेंट पहले की तरह बिना MDR के जारी रहेंगे।

बड़े मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR

₹2,000 से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। हालांकि बड़े पेमेंट के लिए इसकी अधिकतम सीमा तय की गई है। ₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। यह शुल्क पेमेंट सिस्टम से जुड़े बैंकों और ऐप प्रोवाइडर्स समेत अलग-अलग पार्टनर्स के बीच शेयर किया जाएगा।

रेलवे, फ्यूल और जरूरी सेवाओं में सिर्फ ₹5

कुछ जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टरों को अलग राहत दी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसी श्रेणियों में ₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर फ्लैट ₹5 MDR लगेगा। ये सेक्टर UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन के करीब 17 प्रतिशत वॉल्यूम और लगभग 46 प्रतिशत वैल्यू का हिस्सा हैं।

म्यूचुअल फंड और शेयर पेमेंट पर कम शुल्क

कैपिटल मार्केट से जुड़े पेमेंट के लिए MDR काफी कम रखा गया है। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर को किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट के जरिए औपचारिक वित्तीय बाजार में खुदरा भागीदारी को बढ़ावा देना है।

ग्राहकों से अलग से चार्ज वसूलने पर रोक

NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI ऐप प्रोवाइडर्स ग्राहकों से कोई प्लेटफॉर्म फीस या हिडन फीस नहीं ले सकेंगे। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट MDR की लागत सीधे ग्राहकों से न वसूलें। यानी UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक से अलग से MDR के नाम पर पैसा लेने की व्यवस्था नहीं होगी।

MDR की 5% राशि से बनेगा नया फंड

नए सिस्टम के तहत कुल MDR कलेक्शन का 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे मर्चेंट्स के लिए डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने वाले फंड में जाएगा। इसका इस्तेमाल छोटे शहरों, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में UPI स्वीकार करने की सुविधा बढ़ाने में किया जाएगा।

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