Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का नहीं बन पा रहा योग? घर बैठे बस इस स्तुति का करें पाठ, 12 ज्योतिर्लिंग पूजन का मिलेगा फल
Maha Shivratri 2026 Jyotirlinga Darshan: महाशिवरात्रि के दिन शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन अगर आप किसी कारण ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने नहीं जा पा रहे हैं तो आप घर बैठे भी इनके दर्शन करने का पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं।
Maha Shivratri 2026, 12 Jyotirling Darshan Pujan Mantra: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माने जाते हैं। जहां पूरे साल भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन महाशिवरात्रि के दिन इन ज्योतिर्लिंगों में सबसे ज्यादा भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दरअसल महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। ऐसे में इस दिन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना बेहद सौभाग्य की बात मानी जाती है। लेकिन अगर आप इस महाशिवरात्रि ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने की इच्छा रखते हैं और किसी कारण वहां जाने का मौका नहीं मिल पा रहा है। तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आज हम आपको एक ऐसे मंत्र और स्तुति के बारे में बताएंगे जिससे आप घर बैठे एक नहीं बल्कि सभी 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन करने का फल प्राप्त कर सकते हैं।
12 ज्योतिर्लिंग स्तुति (12 Jyotirling Stuti)
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम् ॥1॥
परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥
12 ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् (12 Jyotirlinga Stotram)
- ॥ शिव द्वादशज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम् ॥
- सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्येज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
- भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णतं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥1॥
- श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गेतुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम्।
- तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकंनमामि संसारसमुद्रसेतुम्॥2॥
- अवन्तिकायां विहितावतारंमुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
- अकालमृत्योः परिरक्षणार्थंवन्दे महाकालमहासुरेशम्॥3॥
- कावेरिकानर्मदयोः पवित्रेसमागमे सज्जनतारणाय।
- सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोङ्कारमीशं शिवमेकमीडे॥4॥
- पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधानेसदा वसन्तं गिरिजासमेतम्।
- सुरासुराराधितपादपद्मंश्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि॥5॥
- याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्येविभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः।
- सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकंश्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये॥6॥
- महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तंसम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः।
- सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यैःकेदारमीशं शिवमेकमीडे॥7॥
- सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तंगोदावरीतीरपवित्रदेशे।
- यद्दर्शनात्पातकमाशु नाशंप्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीड॥8॥
- सुताम्रपर्णीजलराशियोगेनिबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः।
- श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तंरामेश्वराख्यं नियतं नमामि॥9॥
- यं डाकिनीशाकिनिकासमाजेनिषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च।
- सदैव भीमादिपदप्रसिद्धंतं शङ्करं भक्तहितं नमामि॥10॥
- सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
- वाराणसीनाथमनाथनाथंश्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये॥11॥
- इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन्समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्।
- वन्दे महोदारतरस्वभावंयरघृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये॥12॥
- ज्योतिर्मयद्वादशलिङ्गकानांशिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण।
- स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्याफलं तदालोक्य निजं भजेच्च॥13॥
- ॥ इति श्रीद्वादशज्योतिर्लिङ्गस्तोत्रम् सम्पूर्णम्। ॥
12 ज्योतिर्लिंग मंत्र (12 Jyotirlinga Mantra)
- सोमनाथ - ॐ सोमनाथाय नमः।
- मल्लिकार्जुन - ॐ मल्लिकार्जुनाय नमः।
- महाकालेश्वर - ॐ महाकालेश्वराय नमः।
- ओम्कारेश्वर - ॐ ओम्कारेश्वराय नमः।
- वैद्यनाथ - ॐ वैद्यनाथाय नमः।
- भीमाशङ्कर - ॐ भीमाशङ्कराय नमः।
- रामेश्वर - ॐ रामेश्वराय नमः।
- नागेश्वर - ॐ नागेश्वराय नमः।
- विश्वनाथ - ॐ विश्वनाथाय नमः।
- त्र्यम्बकेश्वर - ॐ त्र्यम्बकेश्वराय नमः।
- केदारनाथ - ॐ केदारनाथाय नमः।
- घृष्णेश्वर - ॐ घृष्णेश्वराय नमः।
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