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Mesh Sankranti 2026: अप्रैल में मेष संक्रांति कब मनाई जाएगी? जाने इस दिन क्या करने से मिलता है शुभ परिणाम

Mesh Sankranti 2026: हिंदू धर्म में मेष संक्रांति का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सूर्य देव की उपासना करना अत्यंत फलदायी होता है। तो यहां जानिए कि मेष संक्रांति कब मनाई जाएगी और इस दिन क्या करना अच्छा रहेगा।

मेष संक्रांति 2026- India TV Hindi
Image Source : PEXELS मेष संक्रांति 2026

Mesh Sankranti 2026: जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष में प्रवेश करते हैं तब मेष संक्रांति मनाई जाती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है और मेष सूर्य की उच्च राशि है। मेष संक्रांति के साथ ही सूर्य अपनी उत्तरार्ध यात्रा (उत्तरायण) के एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंचते हैं। मेष संक्रांति के दिन ही खरमास समाप्त होता है और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की आराधना करना अत्यंत ही फलदायी माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि अप्रैल में मेष संक्रांति कब है और इस दिन क्या करना लाभकारी रहेगा।

मेष संक्रांति कब है?

पंचांग के अनुसार, मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पुण्य काल सुबह 6 बजकर 22 मिनट से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। वहीं मेष संक्रांति का महा पुण्य काल सुबह 7 बजकर 33 मिनट से सुबह 11 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। मेष संक्रांति के दिन स्नान-दान के लिए यह समय अत्यंत ही शुभ रहेगा।

मेष संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए?

दान

मेष संक्रांति के दिन दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन अन्न का दान करना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन वस्त्र, अन्न, धन और फल दान करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा इस दिन गेहूं, पीले कपड़े, हल्दी और चने की दाल का दान भी लाभदायक माना गया है। मेष संक्रांति के दिन तिल, पानी से भरा हुआ मिट्टी का घड़ा, पंखा, गुड़ और सत्तू का भी दान करें। ऐसा करने से आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

स्नान

मेष संक्रांति के दिन गंगा या अन्य पवित्र नदी में स्नान जरूर करें। ऐसा करने से जाने अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। अगर कहीं जाना संभव नहीं है तो मकर संक्रांति के दिन घर में ही नहाने वाले पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

सूर्य देव की उपासना

मेष संक्रांति के दिन सूर्य देव की आराधना करें। भोर के समय उठकर स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करें। ऐसा करने से व्यक्ति ऊर्जावान और रोग मुक्त रहता है। तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें कुमकुम और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल चढ़ाते हुए ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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