आज शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है। यह दिन माता दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित है। सप्तमी तिथि को महासप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। सप्तमी से दुर्गा पूजा का आरंभ होता है और पंडालों में माता रानी का आगमन होता है। मां कालरात्रि को माता पार्वती का सबसे उग्र रूप माना जाता है। उग्र रूप में विद्यमान अपनी शुभ और मंगलदायक शक्ति के कारण मां कालरात्रि को देवी शुभंकरी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना और मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति को हर भय, नकारात्मक शक्तियां और सभी परेशानी से मुक्ति मिल जाती है।
मां कालरात्रि के इस विशेष मंत्र का जरूर करें जाप
मंत्रमहोदधि में मां कालरात्रि के एक और विशेष मंत्र है, जो कि पूरे एक सौ तैंतीस अक्षरों का मंत्र है। जो व्यक्ति नवरात्र के दौरान उस मंत्र का जप कर लेता है, उसके अंदर अथाह शक्ति आ जाती है। वह किसी भी स्त्री या पुरुष को अपने वश में कर सकता है और किसी को भी अपने ऊपर मोहित कर सकता है।
- ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं काहेन्श्रवरी सर्वजन मनोहरे सर्वमुख स्तंभिनि सर्व राजवशंकरि सर्वदुष्ट निर्दलिनि सर्व स्त्री पुरुषाकर्षिणी बंदिश्रृंखलास्त्रोटय त्रोटय सर्वशत्रून् भञ्जय भञ्जय द्वेष्टृन् निर्दलय निर्दलय सर्वं स्तंभ्य स्तंभय मोहनास्त्रेण द्वेषिणा उच्चाटय उच्चाटय सर्वं वशं कुरु कुरु स्वाहा देहि देहि सर्वं कालरात्रि कामिनि गणेश्वरि:।
नवरात्रि सप्तमी के दिन मां कालरात्रि के इन मंत्रों का करें जाप
मंत्र-
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
प्रार्थना-
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा। वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
भयमुक्त मंत्र
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि। जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
नवरात्रि के सातवें दिन माता रानी को अर्पित करें ये चीजें
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं।
महासप्तमी के दिन मां भगवती को गुड़हल या गुलाब के फूल जरूर अर्पित करें। देवी कालरात्रि को लाल रंग के फूल अति प्रिय है।
रातरानी का फूल भी मां कालरात्रि का प्रिय माना जाता है। तो ये फूल भी सप्तमी पूजा में अवश्य शामिल करें।
महासप्तमी की पूजा में भोग के लिए मालपुआ जरूर बनाएं। गुड़ से बना हलवा, चावल गुड़ की खीर भी मां कालरात्रि को भोग चढ़ा सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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