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नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि के इस शक्तिशाली स्तोत्र और कवच का पाठ, हर संकट से होगी रक्षा, बरसेगी विशेष कृपा

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 17, 2026 08:27 am IST,  Updated : Oct 17, 2026 08:30 am IST

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। इस दिन विधि-विधान के साथ पूजा करने और मां कालरात्रि का स्तोत्र, कवच का पाठ करने से व्यक्ति को हर संकट से शीघ्र छुटकारा मिलता है।

नवरात्रि का सातवां दिन- मां कालरात्रि- India TV Hindi
नवरात्रि का सातवां दिन- मां कालरात्रि Image Source : INDIA TV

नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। इस दिन मां दुर्गा के अत्यंत उग्र और शक्तिशाली स्वरूप देवी कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि की आराधना करने से हर प्रकार के भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता के मुताबिक, जब माता पार्वती ने शुंभ-निशुंभ नामक दैत्यों का अत्याचार समाप्त करने के लिए अपने स्वर्णिम वर्ण को त्याग दिया था, तब उन्हें कालरात्रि के नाम से जाना गया। मां का ये स्वरूप देखने में भले ही भयानक लगता है लेकिन ये बड़ा ही शुभ फलदायक है। देवी कालरात्रि के स्मरण मात्र से ही भूत-पिशाच, भय और अन्य किसी भी तरह की परेशानी तुरंत दूर भाग जाती है। देवी कालरात्रि को देवी महायोगीश्वरी और देवी महायोगिनी के रूप में भी जाना जाता है। वहीं नवरात्रि की सप्तमी तिथि के दिन मां कालरात्रि के इस सिद्ध स्तोत्र और कवच का पाठ अवश्य करें। इससे व्यक्ति को हर भय से मुक्ति मिलती है और मां कालरात्रि की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मां कालरात्रि स्त्रोत

हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।

कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कवच

ॐ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनाम् पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुँह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचण्डी तेरा अवतारा॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूँ तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिन्ता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली माँ जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥

मां कालरात्रि पूजा मंत्र

  1. या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  2. ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का वाहन गधा है और इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से ऊपर का दाहिना हाथ वरद मुद्रा में और नीचे का हाथ अभयमुद्रा में रहता है, जबकि बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड़ग है। मां का ये स्वरूप देखने में भले ही भयानक लगता है, किन्तु ये बड़ा ही शुभ फलदायक है। इनके स्मरण मात्र से ही भूत-पिशाच, भय और अन्य किसी भी तरह की परेशानी तुरंत दूर भाग जाती है। उनके मन से हर प्रकार का डर दूर होता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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