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दशहरा 2026: विजयादशमी कब मनाई जाएगी 20 या 21 अक्टूबर? जानें रावण दहन का शुभ मुहूर्त

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 16, 2026 11:57 pm IST,  Updated : Oct 16, 2026 11:57 pm IST

इस साल दशहरा की तारीख और रावण दहन के मुहूर्त को लेकर भ्रम है। इस बार दशमी तिथि दो दिनों तक रहेगी। ऐसे में जानिए विजयदशमी कब मनाई जाएगी। इसके साथ ही जानें दशहरा के दिन के मुहूर्त और रावण दहन के समय से जुड़ी जरूरी जानकारी।

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विजयादशमी 2026 कब है? Image Source : INDIA TV

दशहरा सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में दशमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों के बीच दशहरा मनाने की सही तारीख को लेकर असमंजस है। कहीं 20 अक्टूबर को तो कहीं 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाने की बात की जा रही है। ऐसे में जानिए दशहरा किस दिन मनाना उचित रहेगा, रावण दहन का शुभ समय क्या है और विजय मुहूर्त कब रहेगा।

दशहरा 2026 की सही तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 21 अक्टूबर को दशहरा मनाने की बात सामने आती है, लेकिन विजयादशमी पर विजय मुहूर्त और प्रदोष काल का भी विशेष महत्व है। ऐसे में 20 अक्टूबर की शाम को रावण दहन किया जा सकता है।

विजयादशमी 2026 का शुभ मुहूर्त

20 अक्टूबर को दशहरा पर विजय मुहूर्त को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस समय पूजा-पाठ और शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक
  • अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 से शाम 3:30 बजे तक

रावण दहन का शुभ समय

  • दशहरे पर प्रदोष काल में रावण दहन करना शुभ माना जाता है। 20 अक्टूबर को शाम 5:47 बजे से प्रदोष काल शुरू होगा। स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार रावण दहन का समय तय किया जा सकता है।
  • निशिता मुहूर्त 20 अक्टूबर की रात 11:41 बजे से 21 अक्टूबर की रात 12:31 बजे तक बताया गया है।

विजयादशमी का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था। इसी कारण दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यह पर्व शारदीय नवरात्रि के समापन का भी प्रतीक है। नौ दिनों तक व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस दिन पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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