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गाय, गुरु के साथ ही इन 7 पर गलती से भी नहीं लगाना चाहिए पैर, चाणक्य नीति में इन्हें बताया गया है पूज्य

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Oct 16, 2026 02:59 pm IST,  Updated : Oct 16, 2026 02:59 pm IST

आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में उन लोगों के बारे में बताया है जिनको गलती से भी पैर से नहीं छूना चाहिए। ये सभी पूज्य हैं और पैरों से इन्हें छूना अनादर होता है।

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चाणक्य नीति Image Source : CANVA

आचार्य चाणक्य की शिक्षाएं जितनी उनके दौर में प्रासंगिक थीं आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती हैं। नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्य ने राजनीति, कुटनीति, समाजशास्त्र के साथ ही धार्मिक विषयों पर भी ज्ञान दिया है। इसके साथ ही चाणक्य जीवन जीने के तौर-तरीकों और संस्कारों पर भी अपनी बात चाणक्य नीति में लिखकर गए हैं। चाणक्य नीति में कुछ लोगों का जिक्र मिलता है जिनका सम्मान हर व्यक्ति को करना चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि इन लोगों पर गलती से भी पैर लगाने से बचना चाहिए। 

श्लोक

पादाभ्यांन स्पृशेदग्निं गुरुं, ब्राह्मणमेव च।

नैव गावं कुमारी च न वृद्धं न शिशुं तथा।।

यह चाणक्य नीति के सप्तम अध्याय का छठा श्लोक है। 

अर्थ- इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आग, गुरु, ब्राह्मण, गाय, कुंवारी कन्या, बुजुर्ग और शिशु यानि बच्चों पर गलती से भी पांव नहीं लगाना चाहिए। ये सातों ही पूज्य होते हैं और इनको पैर से छूना इनका अनादर करना होता है। भूलवश भी इनको पैरों से नहीं छूना चाहिए।  

अग्नि: सनातन संस्कृति में अग्नि को देवता और अत्यंत पवित्र माना गया है। हवन, यज्ञ और पूजा-पाठ में अग्नि के माध्यम से ही देवताओं को आहुति दी जाती है। इसलिए अग्नि को पैरों से छूना या उस पर पैर रखना महापाप और घोर अनादर माना जाता है।

गुरु: माता-पिता के बाद गुरु को हिंदू धर्म में भगवान का दर्जा दिया गया है। गुरु ही हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं। गुरु का स्थान सर्वोपरि है, इसलिए उनका आदर हमेशा करना चाहिए।

ब्राह्मण: ज्ञान, वेद और धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले तथा पूजा-पाठ संपन्न कराने वाले ब्राह्मणों को समाज में पूज्य स्थान दिया गया है। उनका सम्मान करना धार्मिक कर्तव्य माना गया है।

गाय: हिंदू धर्म में गाय को 'गोमाता' कहा जाता है, जिसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास भी माना गया है। गाय ममता, सेवा और पवित्रता का प्रतीक है। गौमाता का स्पर्श हमेशा श्रद्धा भाव से करना चाहिए। गलती से भी कभी गौ माता पर आपको पैर नहीं लगाना चाहिए।

कुंवारी कन्या: कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। कुंवारी कन्याओं का सम्मान घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के दौरान कन्याओं की पूजा की जाती है इसलिए कभी भी उनका अनादर नहीं करना चाहिए। 

बुजुर्ग: परिवार और समाज के बुजुर्ग व्यक्ति अनुभव और संस्कारों की पूंजी होते हैं। उनका आशीर्वाद जीवन को सफल बनाता है, इसलिए उनका अपमान कभी नहीं करना चाहिए।

शिशु या छोटे बच्चे: छोटे बच्चे भगवान का रूप माने जाते हैं, जो छल-कपट से दूर होते हैं। उनकी मासूमियत का सम्मान किया जाना चाहिए, बच्चों का अनादर आपको कभी नहीं करना चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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