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अक्टूबर में राम नवमी है या महा नवमी? दूर करें सबसे बड़ा कन्फ्यूजन

राम नवमी का त्योहार चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मनाया जाता है जबकि शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन को महा नवमी के नाम से जाना जाता है। जानिए राम नवमी और महा नवमी के बीच का बड़ा अंतर क्या है।

ram navami maha navami- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV राम नवमी और महा नवमी के बीच अंतर क्या है?

इन दिनों लोग राम नवमी की तारीख को लेकर काफी ज्यादा सर्च कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अक्सर लोग राम नवमी और महा नवमी को एक ही समझ लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये दोनों अलग-अलग त्योहार हैं। राम नवमी चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को मनाई जाती है तो वहीं आश्विन नवरात्रि की नवमी को महा नवमी के नाम से जाना जाता है। इसे राम नवमी नहीं कहा जाता। चलिए जानते हैं इन दोनों त्योहारों के बीच का बड़ा अंतर।

राम नवमी और महा नवमी में अंतर

राम नवमी  महा नवमी

राम नवमी चैत्र नवरात्रि की नवमी को मनाई जाती है।

महा नवमी शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि को कहते हैं।

राम नवमी का त्योहार भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है इसलिए इस दिन मुख्य रूप से भगवान राम की पूजा होती है।

महा नवमी पर देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। 

राम नवमी पर चैत्र नवरात्रि का समापन होता है।

महा नवमी पर शारदीय नवरात्रि पर्व का समापन होता है।

राम नवमी पर विशेष रूप से रामायण का पाठ किया जाता है।

महा नवमी पर कन्या पूजन और हवन पूजा का विशेष महत्व होता है।

 रामनवमी में दिन की पूजा का महत्व है। 

जबकि महानवमी पर दिन की पूजा के साथ ही रात्रि की पूजा का भी खास महत्व है। इस दिन कई श्रद्धालु प्रदोष काल और निशीथ काल में भी पूजा करते हैं।

लेकिन अब कई लोग राम नवमी पर भी वैसे ही अनुष्ठान करने लगे हैं जैसे कि शारदीय नवरात्रि की नवमी पर करते हैं। जैसे अब शारदीय नवरात्रि की नवमी की तरह ही राम नवमी पर भी कन्या पूजन और चंडी होम किया जाता है। जबकि चैत्र नवरात्रि की नवमी पर ये अनुष्ठान जरूरी नहीं माना जाता है। 

महा नवमी कब है 2026

महा नवमी का त्योहार 19 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु व्रत रहेंगे और मां सिद्धिदात्री की पूजा करके हवन अनुष्ठान संपन्न करेंगे। साथ ही इस दिन कन्या पूजन भी किया जाएगा। लेकिन जो लोग किसी कारण 19 तारीख को नवमी हवन न कर पाएं तो वे 20 अक्टूबर की सुबह 06:25 से दोपहर 12:50 के बीच भी ये अनुष्ठान संपन्न कर सकते हैं। ध्यान रहे कि इस दिन 12:50 के बाद दशमी तिथि लग जाएगी इसलिए नवमी से जुड़े अनुष्ठान बेहतर होगा कि दशमी लगने से पहले ही पूर्ण कर लें।

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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