ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा गया है। जब राहु और केतु जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में होते हैं या अन्य ग्रहों के साथ प्रतिकूल योग बनाते हैं, तब व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। तो अगर आपकी कुंडली में राहु-केतु दोष है सावन शिवरात्रि के दिन इन विशेष उपायों को जरूर करें। बता दें कि भगवान शिव को राहु और केतु सहित सभी ग्रहों का स्वामी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी की आराधना से ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। सावन शिवरात्रि के दिन ये उपाय इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं। तो आइए आचार्य इंदु प्रकास से जानते हैं राहु-केतु दोष के लक्षण और उपाय के बारे में।
राहु-केतु दोष के लक्षण
- बार-बार कार्यों में बाधा आना
- मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति
- करियर में अस्थिरता
- पारिवारिक कलह
- आर्थिक हानि
- विवाह में देरी या वैवाहिक समस्याएं
- अचानक दुर्घटनाओं या विवादों का सामना करना
राहु-केतु दोष दूर करने के लिए सावन शिवरात्रि पर करें ये विशेष उपाय
भगवान शिव की पूजा
सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध और जल अर्पित करें। अभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का 108 बार जाप करें। ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होने लगते हैं। इसके अलावा सावन शिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने से भी इन ग्रह का अशुभ प्रभाव कम होता है।
भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। सावन शिवरात्रि पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि बेलपत्र टूटा हुआ न हो और न ही उसमें कीड़ा लगा हो। बेलपत्र पर 'ॐ' लिखकर अर्पित कर सकते हैं और बेलपत्र चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
नाग देवता की पूजा करें
राहु और केतु का संबंध सर्प ऊर्जा से माना जाता है। इसलिए सावन शिवरात्रि के दिन नाग देवता की पूजा करना शुभ माना जाता है। सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर चांदी के नाग-नागिन अर्पित करें। इसके साथ ही नाग देवता के मंत्रों का जाप करें और सर्पों के संरक्षण और जीवों की सेवा का संकल्प लें।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
राहु और केतु से उत्पन्न भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावी माना जाता है। सावन शिवरात्रि के दिन महामृत्युंजय मंत्र का 108 या 1100 बार जाप करें। मंत्र है- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
राहु-केतु शांति पाठ करवाएं
यदि कुंडली में राहु-केतु की स्थिति अत्यधिक पीड़ादायक है, तो किसी योग्य ज्योतिषाचार्य के मार्गदर्शन में राहु-केतु शांति पाठ या विशेष पूजा करवाना लाभदायक हो सकता है। सावन शिवरात्रि के दिन राहु-केतु शांति पाठ जरूर कराएं। इसके अलावा सावन शिवरात्रि के दिन गरीब, जरूरतमंद को काले तिल, वस्त्र और अन्न का दान करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
ये भी पढ़ें:
अगस्त में सावन अमावस्या कब है? जान लीजिए सही तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त