सोशल मीडिया के जरिए अवैध कमाई का एक चौंकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया है। यहां कुछ युवक इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कथित तौर पर ग्राहकों तक पहुंचने के लिए करते थे और फिर टेलीग्राम के माध्यम से प्रतिबंधित बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) उपलब्ध कराने के नाम पर ऑनलाइन पैसे वसूलते थे। लंबे समय से चल रहे इस नेटवर्क का खुलासा होने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, पूरे मामले का सुराग गूगल और बच्चों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) से मिली सूचना के आधार पर मिला। यह सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के जरिए साझा की गई थी, जिसमें एक इंस्टाग्राम अकाउंट से बाल यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री अपलोड किए जाने की जानकारी दी गई थी।
इंस्टाग्राम-टेलीग्राम के जरिए चल रहा था गंदा खेल
सूचना मिलते ही साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल नंबर और IMEI नंबर के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई। जांच के दौरान पता चला कि संबंधित सिम कार्ड चकेरी क्षेत्र की नई बस्ती गदियाना निवासी मो. उवेश के नाम पर पंजीकृत था। पूछताछ में उवेश ने बताया कि उसने यह सिम करीब दो साल पहले खरीदी थी और बाद में अपने दोस्त सैय्यद शारान को इस्तेमाल के लिए दे दी थी।
इसके बाद पुलिस ने सैय्यद शारान से पूछताछ की। जांच में सामने आया कि वह अपने साथी आकिब खान के साथ मिलकर इंस्टाग्राम पर अवैध सामग्री के छोटे-छोटे क्लिप पोस्ट करता था। जो लोग पूरा वीडियो मांगते थे, उन्हें टेलीग्राम पर संपर्क कराया जाता था और वहां कथित तौर पर 500 से 2000 रुपये तक ऑनलाइन भुगतान लेकर सामग्री भेजी जाती थी।
2 सालों से एक्टिव था गिरोह
प्रारंभिक जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी करीब दो सालों से इस गतिविधि में सक्रिय थे और 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो अपलोड कर चुके थे। हालांकि, पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े थे तथा अवैध कमाई का दायरा कितना बड़ा था।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए जा सकें और नेटवर्क के अन्य लिंक सामने आ सकें। एडीसीपी साइबर क्राइम शिवा सिंह ने कहा कि बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का निर्माण, संग्रह, प्रसारण या खरीद-फरोख्त कानून के तहत गंभीर अपराध है। आरोपियों के खिलाफ IT एक्ट, पॉक्सो (POCSO) कानून और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
(रिपोर्ट: अनुराग श्रीवास्तव)
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