उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां जन्म से सुनने और बोलने में असमर्थ 19 वर्षीय खुशी गुप्ता की अब पहली बार मुंह से आवाज निकली है। उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे- "थैंक्यू योगी जी"। यह वह पल था, जिसने पूरे परिवार को भावुक कर दिया। खुशी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुछ तस्वीरें खुद पेंटिंग के रूप में बनाई हैं और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेंट करने की इच्छा जताई है।
90KM पैदल चलकर CM योगी से मिलने पहुंची थी
खुशी गुप्ता ग्वालटोली क्षेत्र की रहने वाली हैं। वह जन्मजात मूक-बधिर थीं, जिसके कारण परिवार को हमेशा उनकी देखभाल में चुनौतियां झेलनी पड़ती थीं। लेकिन नवंबर 2025 में खुशी ने एक अनोखा कदम उठाया। बिना किसी को बताए वह घर से निकल पड़ीं और लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके लखनऊ पहुंच गईं। उनका एकमात्र उद्देश्य था- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना और उन्हें अपनी बनाई तस्वीरें सौंपना। रास्ते में उन्हें भूख-प्यास और थकान का सामना करना पड़ा, पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन खुशी हौसला नहीं डगमगाया।
सीएम योगी को भेंट कीं पेंटिग्स
22 नवंबर 2025 को खुशी सीएम आवास के बाहर रोती हुई मिलीं। पुलिस ने उन्हें थाने ले जाकर सुरक्षा प्रदान की। इशारों और स्क्रैच आर्ट के माध्यम से उन्होंने पुलिस को बताया कि वे योगी जी से मिलना चाहती हैं। जब यह बात मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत खुशी को बुलाने के निर्देश दिए। 26 नवंबर को सरकारी व्यवस्था से खुशी और उनका परिवार मुख्यमंत्री आवास पहुंचा। मुलाकात के दौरान खुशी ने अपनी बनाई पेंटिंग्स भेंट कीं। योगी आदित्यनाथ ने उन्हें स्नेह से गले लगाया, आशीर्वाद दिया और उनके इलाज, शिक्षा व परिवार की सहायता के आदेश जारी किए। उन्होंने खुशी की पढ़ाई के लिए विशेष व्यवस्था, कान की मशीन और आवास जैसी सुविधाओं का प्रबंध करने को कहा।
सीएम से मुलाकात के बाद शुरू हुआ था इलाज
मुलाकात के बाद खुशी का इलाज शुरू हुआ। शुरू में एक कान का ऑपरेशन किया गया, लेकिन उससे कोई खास फायदा नहीं हुआ। बाद में मल्होत्रा अस्पताल के डॉक्टर रोहित मल्होत्रा ने जांच की और पाया कि खुशी को कोक्लियर इम्प्लांट की जरूरत है। इस महंगे इलाज (लगभग 6-7 लाख रुपये) के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर सहायता प्रदान की गई। दिव्यांगजन कल्याण विभाग, संबंधित फाउंडेशन और आयुष्मान भारत योजना के तहत 26 जनवरी 2026 को खुशी का कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक हुई।
ऑपरेशन के बाद बदली खुशी की जिंदगी
ऑपरेशन के बाद खुशी की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अब वह धीरे-धीरे सुनने लगी है और बोलने की कोशिश कर रही है। शुरुआत में टूटे-फूटे शब्द ही निकल पा रहे हैं, लेकिन स्पीच थेरेपी के जरिए प्रगति हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले तीन महीनों में वह बेहतर बोलना शुरू कर देगी और एक साल के भीतर सामान्य बच्चों की तरह बातचीत करने लगेगी। घर लौटने के बाद खुशी अब अपनी मां से बोलकर पसंदीदा खाना मांगती है, टीवी पर योगी जी को देखकर उनकी तस्वीरें बनाती है और बार-बार कहती है कि "बाबा जी से मिलना है"।
खुशी के पिता हुए भावुक
खुशी के पिता कल्लू गुप्ता भावुक होकर बताते हैं कि बेटी को सुनते-बोलते देखकर दिल खुश हो जाता है। पहले परिवार को कभी उम्मीद नहीं थी कि उनकी बेटी ऐसी जिंदगी जी पाएगी। मां गीता कहती हैं कि ऑपरेशन ने बिटिया की जिंदगी में नई रोशनी भर दी है। पहले इशारों से बात होती थी, अब वह अपनी इच्छाएं शब्दों में व्यक्त कर पाती है। परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करता है, जिनके हस्तक्षेप से यह संभव हुआ। खुशी का सपना अब पुलिस अफसर बनना है, और परिवार को लगता है कि उसका भविष्य उज्ज्वल है।
यह कहानी न केवल एक मूक-बधिर युवती की हिम्मत की मिसाल है, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व और सरकारी सहायता से जीवन कैसे बदल सकता है, इसका जीता-जागता प्रमाण भी है। खुशी की यात्रा और उसका नया सवेरा लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है।
(रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव)
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