उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस बीच राज्य के चंदौली जिले में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। विधानसभा चुनाव से पहले ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) में बड़ी बगावत हो गई है। ओमप्रकाश राजभर से नाराज दर्जनों पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के वाराणसी मंडल प्रमुख महासचिव युवा मोर्चा दीपक राजभर ने पार्टी के प्रमुख पर बड़ा आरोप लगाया है। दीपक राजभर ने कहा कि ओमप्रकाश राजभर अपने मूल सिद्धांतों और मुद्दों से भटक गए हैं।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
दीपक राजभर ने आरोप लगाया है कि 20-24 साल से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है, जबकि समाज के विकास के बजाय नेतृत्व के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। इस्तीफा देने वालों ने 2027 के टिकट वितरण पर भी सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि राजभर समाज के वोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है और बाहुबलियों को टिकट दिए जाने की आशंका है। इस्तीफा देने वालों ने कहा कि अब राजभर समाज अपने हक, हिस्सेदारी और सम्मान के आधार पर राजनीतिक फैसला करेगा। नेताओं ने दावा किया कि आने वाले दिनों में और भी कार्यकर्ता पार्टी छोड़ सकते हैं।
सुधार की जरूरत पर चर्चा की थी- बबलू राजभर
सुभासपा छोड़ने वालों में युवा मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि बबलू राजभर, वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं। बबलू राजभर ने आरोप लगाया कि ओमप्रकाश राजभर जिस समाज के समर्थन से राजनीति में आगे बढ़े, उसी समाज के लोग आज भी आवास, नाली, खड़ंजा और रास्ते जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि पदाधिकारियों ने 16 तारीख को अंबेडकर नगर में ओमप्रकाश राजभर से संगठन की कमजोर स्थिति और सुधार की जरूरत पर चर्चा भी की थी, लेकिन इसके बाद भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया।
राजभर पर सिद्धांतों और मुद्दों से भटकने का आरोप
वहीं, वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर ने आरोप लगाया कि ओमप्रकाश राजभर अपने मूल सिद्धांतों और मुद्दों से भटक गए हैं। उन्होंने कहा कि राजभर समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के वादे के साथ पार्टी बनाई गई थी, लेकिन आज पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। दीपक राजभर ने टिकट वितरण में कथित सौदेबाजी और बाहुबलियों को टिकट देने के आरोप भी लगाए। उन्होंने 2022 के सपा-सुभासपा गठबंधन का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब पार्टी को 16 सीटें मिली थीं, तो कितने राजभर समाज के लोगों को चुनाव लड़ाया गया? उन्होंने आशंका जताई कि 2027 में भी टिकट वितरण में ऐसा ही हो सकता है। उनका कहना है कि अब राजभर समाज अपने हक, हिस्से और सम्मान के आधार पर राजनीतिक निर्णय लेगा। आपको बता दें कि दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बात का ऐलान भी कर दिया है कि वह विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का मेनिफेस्टो कब जारी करेंगे।
'और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं'
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों तक पार्टी के लिए चंदा जुटाने, गांव-गांव जाकर प्रचार करने और संगठन को मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं को नेतृत्व से मिलने तक का मौका नहीं मिलता, जबकि प्रभावशाली लोगों को आसानी से तवज्जो दी जाती है। उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश राजभर मंत्री बनने के बाद समाज के बजाय अपने विकास पर ध्यान दे रहे हैं। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं। फिलहाल, इन आरोपों पर ओमप्रकाश राजभर या सुभासपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। (रिपोर्ट: संतोष कुमार)
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