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गाजियाबाद में चलती कार के अंदर होती थी भ्रूण लिंग की जांच, चार आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

गाजियाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें चलती कार के अंदर भ्रूण लिंग की जांच करने और गर्भपात कराने वाले गैंग के चार सदस्यों को पुलिस ने 4 जुलाई की रात को गिरफ्तार किया।

भ्रूण लिंग की जांच में...- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT भ्रूण लिंग की जांच में पकड़े गए चार आरोपी।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यहां पर चलती कार के अंदर पोर्टेबल मशीन से अवैध भ्रूण लिंग जांच का खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने 4 जुलाई की देर रात मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए कार संख्या UP14 FL 9355 को कोतवाली थाना क्षेत्र में रोककर अवैध भ्रूण लिंग जांच का भंडाफोड़ किया। कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए भ्रूण का लिंग बताए जाने का आरोप है। मौके से आरोपी संदीप, सलमान, शाहिद और तस्लीम को हिरासत में लिया गया है। मुख्य आरोपी संदीप के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। इसके बावजूद यदि वह इस तरह का अवैध कारोबार चला रहा था।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग आरोपियों से कर रही पूछताछ

गाजियाबाद में चलती कार के अंदर अवैध लिंग जांच के आरोप में पकड़े गए चार आरोपियों से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा कितने समय से यह अवैध धंधा चल रहा था। यह गैंग गाजियाबाद, दिल्ली और एनसीआर में अलग-अलग जगहों पर घूमकर कार में ही 8 से 10 हजार रुपए में महिलाओं के भ्रूण के लिंग की जांच करता था। वहीं अगर महिला गर्भपात कराने की डिमांड करती तो उसे नर्सिंग होम में ले जाकर झोलाछाप डॉक्टर से गर्भपात भी कराते थे। इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। यदि शहर में चलती कार के अंदर अवैध लिंग जांच का गिरोह सक्रिय था, तो आखिर स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी और पीसीपीएनडीटी सेल की जांच व्यवस्था क्या कर रही थी? बिना किसी सूचना के यह नेटवर्क कब से संचालित हो रहा था और अब तक विभाग की नजर से कैसे बचा रहा?

आरोपियों को पकड़ने के लिए चार सदस्यीय टीम का किया गया था गठन

अवैध भ्रूण लिंग की जांच करने के आरोप में पकड़े गए आरोपियों को दबोचने के लिए 4 जुलाई की रात करीब 12 बजे सीएमओ को मुखबिर से गैंग के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद सीएमओ ने इनको पकड़ने के लिए नोडल अधिकारी की निगरानी में चार सदस्यीय टीम का गठन किया था। इस मामले में पकड़े गए एक आरोपी संदीप ने पुलिस पूछताछ में बताया कि कार में भ्रूण लिंग की जांच इसलिए करते थे जिससे पुलिस और सीएमओ को इसका पता नहीं चल सके।

(रिपोर्ट - जुबैर अख्तर)

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