मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की अजनार नदी को अकेले साफ करने वाले युवा पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी मेहनत नहीं, बल्कि लोगों की लापरवाही है। नदी की दूसरी बार सफाई के बाद उन्होंने किनारे पर दो कूड़ेदान लगाए थे ताकि लोग कचरा नदी में न फेंकें। लेकिन कुछ ही दिनों बाद जब वे वहां पहुंचे तो एक कूड़ेदान गायब मिल गया। बिट्टू ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा, “कसम खा ली है न सुधरने की!”
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @bittu_tabahi नामक हैंडल से शेयर किया गया है। बिट्टू तबाही ने जनवरी 2026 से करीब आठ महीने तक अजनार नदी की सफाई की थी। उन्होंने बिना किसी बड़े उपकरण या सरकारी मदद के टन भर कचरा निकाला। उनकी मेहनत वायरल हुई, मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात हुई और विदेश से भी नौकरी का ऑफर मिला। लेकिन सफाई के कुछ हफ्तों बाद ही नदी फिर कचरे से पट गई। प्लास्टिक, पॉलीथिन, फूल-माला और अन्य कचरा दोबारा जमा हो गया। इसके बाद बिट्टू ने दोबारा सफाई शुरू की। दूसरी सफाई के बाद उन्होंने नदी किनारे एक पेड़ के पास दो कूड़ेदान रखे। मकसद साफ था- लोगों को कचरा नदी में फेंकने के बजाय कूड़ेदान में डालने का विकल्प देना। लेकिन शुक्रवार को जब वे वहां पहुंचे तो एक कूड़ेदान गायब था। वीडियो में वे निराश नजर आते हैं और कहते हैं कि ये कूड़ेदान उनके निजी इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि जनता की सुविधा के लिए लगाए गए थे ताकि नदी दोबारा प्रदूषित न हो।
यूजर्स ने निकाली भड़ास
बिट्टू के इस अनुभव ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। कई यूजर्स ने स्थानीय प्रशासन से जुर्माना लगाने और जागरुकता अभियान चलाने की मांग की। कुछ ने कहा कि सिर्फ एक व्यक्ति की मेहनत काफी नहीं, समाज को भी जिम्मेदार बनना होगा। बिट्टू पहले भी कह चुके हैं कि नदी गंदा करना आसान है, लेकिन साफ करना बहुत मुश्किल। एक यूजर ने लिखा कि, 'भाई ये कुछ पब्लिक ऐसी ही है हा इनको गंदी में रखना पसंद है।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'लोग कैसे होते हैं यार और हम सरकार को दोष देते हैं।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'इसीलिए मैंने आपको पुलिस से बात करने और सुरक्षा गार्ड का इंतजाम करने को कहा था। वरना भारतीय मानसिकता को देखते हुए आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाएगी।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'भाई तू बहुत गलत जगे मेहनत कर रहा है ये कभी नहीं सुधरने वाले लोग हैं।'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'भाई, छोड़ो इसे, लोग समझाने से परे हैं, जाहिर है वे अपनी तथाकथित परंपराओं के बहाने दूसरों को असुविधा पहुँचाना पसंद करते हैं।'
सिविक सेंस पर उठे सवाल
यह घटना सिर्फ एक कूड़ेदान चोरी की नहीं है। यह उस मानसिकता को उजागर करती है जिसमें पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं समझा जाता। युवा जब अकेले दम पर नदियों को साफ करते हैं तो समाज का सहयोग जरूरी हो जाता है। अजनार नदी की यह कहानी याद दिलाती है कि सफाई अभियान तभी सफल होंगे जब लोग खुद कचरा न फैलाएं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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