बेंगलुरु की भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर धीमी और शांत जिंदगी अपनाने का सपना कई युवाओं का होता है। एक कपल ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया। राधिका और एकांश ने बेंगलुरु छोड़कर गोवा शिफ्ट किया और एक महीने बाद बताया कि यह फैसला पूरी तरह सही था। उन्होंने शिफ्टिंग पर करीब 75,500 रुपये खर्च किए और इसे “absolutely worth it” बताया।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम हैंडल @radhi.and.ekansh से शेयर किया गया है। राधिका ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, “बेंगलुरु से गोवा आने के एक महीने हो गए हैं। हम धीमी जिंदगी जीने की उम्मीद में यहां आए हैं।” कपल ने एक साल से ज्यादा समय तक इस शिफ्ट की प्लानिंग की थी। दोनों के पास रिमोट जॉब हैं, जिससे उन्हें शहर बदलने में आसानी हुई।
शिफ्टिंग के खर्च के बारे में बताया
शिफ्टिंग का खर्च उन्होंने विस्तार से बताया। बेंगलुरु की सोसाइटी छोड़ने और सामान स्टोर करने में 15,000 रुपये लगे। सामान गोवा भेजने में 24,000 रुपये खर्च हुए। बेंगलुरु से गोवा रोड ट्रिप (कार सर्विसिंग, पीयूसी और पेट्रोल समेत) पर 10,000 रुपये आए। गोवा पहुंचने के बाद घर ढूंढने में तीन हफ्ते लगे। इस दौरान पेट्रोल पर 5,000 रुपये और किराने-खाना-आउटिंग पर 12,000 रुपये खर्च हुए। घर मिलने के बाद एसी, वॉशिंग मशीन लगवाने और बढ़ई-प्लंबर की सेवाओं पर करीब 9,500 रुपये लगे। कुल अतिरिक्त खर्च 75,500 रुपये बैठा। Airbnb पर हुए 45,000 रुपये के खर्च को उन्होंने इसमें शामिल नहीं किया, क्योंकि वह बेंगलुरु के किराए के बराबर था। राधिका ने कहा, “लोग गोवा की पांच दिन की ट्रिप पर 30,000 से 40,000 रुपये खर्च कर देते हैं। हमने पूरी नई जिंदगी शुरू करने के लिए 75,000 रुपये खर्च किए। यह बिल्कुल इसके लायक है।”
बेंगलुरु छोड़कर क्यों चुना गोवा
कपल बेंगलुरु में सात साल रह चुका था। वहां उनका मासिक खर्च करीब 1.3 लाख रुपये था, जिसमें अकेले किराया 56,000 रुपये था। उन्होंने घर खरीदने के बजाय किराए पर रहने का फैसला लिया था। एकांश ने कहा कि घर न खरीदने की वजह से उनके पास कोई बड़ा ईएमआई बोझ नहीं था, इसलिए जॉब खोने का डर भी कम था। उन्होंने कहा, “हम शायद इस बात पर नफरत कमा लें, लेकिन बेंगलुरु छोड़कर गोवा आने का एक बड़ा कारण यही था कि हमने यहां घर नहीं खरीदा।” कपल ने बताया कि समुद्र के करीब रहना, क्रिएटिव कम्युनिटी से घिरे होना और आईटी-कॉरपोरेट से अलग तरह के लोग मिलना उन्हें आकर्षित करता है। “यह पूरी तरह अलग जिंदगी जैसा लगता है। हम धीमी जिंदगी चाहते थे, लेकिन बोरिंग नहीं।”
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ। कई लोग कपल की हिम्मत और प्लानिंग की तारीफ कर रहे हैं। कुछ ने कहा कि मेट्रो सिटी की ट्रैफिक, महंगाई और स्ट्रेस से दूर जाना अच्छा फैसला है। कुछ ने रिमोट जॉब की अहमियत पर जोर दिया। राधिका और एकांश का मानना है कि गोवा में यह नया अध्याय शुरू करना हर रुपये के लायक था।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक टेक्नीशियन ने बेंगलुरु में रहने के चैलेंज के बारे में बताया था, जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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