मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में एक विदेशी पर्यटक का अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। ब्रिटिश ट्रैवलर डियाना (Deanna), जिनका इंस्टाग्राम अकाउंट @sociallywanderful है, ने स्थानीय पारंपरिक स्नैक ‘मोशोन’ (Moshon) को आजमाया, जो असल में खाने योग्य मिट्टी या क्ले है। उन्होंने वीडियो में ईमानदार प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह मेरे लिए नहीं है।”
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो में डियाना शिलॉन्ग की अपनी पहली यात्रा पर थीं। उन्होंने वीडियो का शीर्षक रखा—‘Trying edible clay in Shillong’। स्थानीय दुकान पर छोटे-छोटे पत्थर जैसे टुकड़े देखकर वे आकर्षित हुईं। एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें दिखाते हुए कहा, “यह पूरी तरह गलत लगता है, है ना? लेकिन आप इसे खा सकते हैं।” डियाना ने हैरानी जताते हुए कहा, “ओह माय गॉड!” फिर उन्होंने कैमरे की ओर देखते हुए बताया, “मैं मेघालय के शिलॉन्ग में हूं और मुझे बताया गया है कि यहां एक लोकप्रिय स्नैक मोशोन है, जो असल में मिट्टी है। तो मैं मिट्टी चबाऊंगी।” उन्होंने एक टुकड़ा मुंह में रखा और तुरंत प्रतिक्रिया दी। “ओह माय गॉड! ऐसा लग रहा है जैसे मेरे मुंह में सचमुच चॉकबोर्ड जैसा कुछ है। यह मेरे लिए नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि यह अहसास मुंह में चॉक जैसा बना रहा।
वीडियो पर लिखी ये बात
वीडियो शेयर करते हुए डियाना ने लिखा, “शिलॉन्ग में मेरी पहली यात्रा। कह सकते हैं कि मैं कुछ भी आजमाने के लिए तैयार थी, जिसमें खाने योग्य मिट्टी भी शामिल है। जाहिर तौर पर यह गर्भावस्था में आम क्रेविंग है, जो जानना दिलचस्प था।” उन्होंने जोड़ा कि हालांकि मोशोन वह स्नैक नहीं है जिसे वे खुद चुनें, लेकिन इसे आजमाना रोचक रहा।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। एक यूजर ने लिखा, “आपने मुझे किंडरगार्टन के उस बच्चे की याद दिला दी जो मिट्टी खाया करता था।”
दूसरे ने कहा, “पत्थरों के कोर से ताजा, शुगर-फ्री स्नैक। यह बच्चों और महिलाओं में काफी प्रसिद्ध है।”
किसी ने स्वास्थ्य संबंधी पहलू जोड़ते हुए टिप्पणी की, “यह प्रकृति से विटामिन का स्रोत है। मैंने अफ्रीकी जनजातियों में कमी रोकने के लिए इसे खाते देखा है।”
एक स्थानीय व्यक्ति ने हैरानी जताई, “यह क्या है? कभी नहीं आजमाया। मैं तो लोकल हूं।”
किसी ने मजाक में कहा, “जितना ज्यादा खाओगे, उतना ज्यादा आदत पड़ जाएगी।”
क्या होती है मोशोन
मोशोन मेघालय के कुछ हिस्सों में दशकों से खाया जाने वाला पारंपरिक खाद्य पदार्थ है। यह स्थानीय संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बच्चों और महिलाओं में लोकप्रिय है। कुछ लोग इसे गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्वों की कमी पूरी करने से जोड़ते हैं। दुनिया के अन्य हिस्सों, जैसे अफ्रीका की कुछ जनजातियों में भी ऐसी मिट्टी खाने की प्रथा पाई जाती है, जहां इसे विटामिन और खनिजों का स्रोत माना जाता है।
गौरतलब है कि, इससे पहले बिना इंश्योरेंस के भारत में मिले कॉन्टैक्ट लेंस मिलने पर अमेरिकी टूरिस्ट का रिएक्शन वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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