गुरुग्राम में भारी बारिश के दौरान परिवहन व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। शहर की एक महिला आस्था गोयल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि बारिश में सिर्फ 7 किलोमीटर की दूरी के लिए एक ऑटो चालक ने 800 रुपये मांगे। इस मांग को सुनकर वे हैरान रह गईं और बोलीं, 'यह तो पागलपन है।' इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने शहर में बारिश के मौसम में यात्रियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में बताया, जब यातायात जाम और परिवहन के सीमित विकल्पों के कारण छोटी यात्राएं भी मुश्किल और महंगी हो जाती हैं।
'सिर्फ 7 किलोमीटर के लिए 800 रुपये'
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @astha.goyal_27 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में आस्था ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, 'गुड़गांव की तरह, मुझे खुशी है कि मुझे पछतावा हो रहा है... पता है, मुझे लगता है कि मुझे इतना पछतावा पहले कभी नहीं हुआ। सब जानते हैं कि बारिश के दौरान गुड़गांव का क्या हाल होता है। और अब मेरे साथ एक घटना घट गई। 7 किलोमीटर के लिए एक ऑटो वाले ने 800 रुपये मांगे, भाई। 800 रुपये! सिर्फ 7 किलोमीटर के लिए। बेंगलुरु का ट्रैफिक तो बदनाम है, भाई, ये तो हद ही हो गई!' आस्था गोयल ने स्थिति की तुलना बेंगलुरु से की, जो अक्सर ऑनलाइन अपने ट्रैफिक जाम के लिए चर्चा में रहने वाला शहर है, और कहा कि गुड़गांव में उनके हालिया अनुभव ने उन्हें स्तब्ध कर दिया। उन्होंने इस क्लिप को एक छोटे से कैप्शन के साथ साझा किया, जिसमें लिखा था, "गुड़गांव, यह कैसा व्यवहार है?"
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो के वायरल होते ही इस पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि, 'मैंने 0.5 किलोमीटर के लिए 150 रुपये दिए हैं।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'गुड़गांव और दिल्ली-एनसीआर के लिए, अपना वाहन होना अक्सर सबसे अच्छा विकल्प होता है। गुड़गांव में, ऑटो चालक अक्सर यात्रियों के पास सीमित विकल्पों का फायदा उठाते हैं और अत्यधिक किराया वसूलते हैं।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'कल हमें सिर्फ 3-4 किलोमीटर की कैब राइड के लिए 500 रुपये चुकाने पड़े।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'यह बिल्कुल सच है।'
गौरतलब है कि, इससे पहले गुरुग्राम में महिला ने कैब ड्राइवर के धैर्य की तारीफ की थी। इस वीडियो को कई यूजर्स ने पसंद किया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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