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'वह मेरा सहकर्मी है सिर्फ ड्राइवर नहीं..' बॉस ने ₹4.25 लाख में कराई कर्मचारी की बाईपास सर्जरी; यूजर्स ने की तारीफ

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है। जिसमें दावा बॉस द्वारा कर्मचारी की बाईपास सर्जरी कराने का दावा किया गया है।

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Image Source : PEXELS बॉस ने कराई कर्मचारी की सर्जरी।

नौकर-मालिक के रिश्ते में अक्सर दूरी होती है, लेकिन कभी-कभी इंसानियत इस दूरी को मिटा देती है। ऐसा ही कुछ सोशल मीडिया पर इन दिनों देखने को मिला। दरअसल, एक कार्डियक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने एक ऐसी घटना शेयर की जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। एक बॉस ने अपने 15 साल से साथ काम कर रहे ड्राइवर की बाईपास सर्जरी का पूरा खर्च ₹4.25 लाख खुद उठाया। बताया गया है कि, जब सर्जन ने आभार व्यक्त करने के लिए फोन किया, तो बॉस ने उस व्यक्ति को अपना ड्राइवर कहने से इनकार कर दिया और उसे 15 वर्षों का एक सम्मानित "सहकर्मी" बताया। 

एक्स पर शेयर की गई पोस्ट 

इस पोस्ट को एक्स पर @drprashantmish6 नामक हैंडल से शेयर की गई है। कार्डियक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने बताया कि एक ड्राइवर जब बाईपास सर्जरी के लिए उनके पास आया, तो उन्होंने ऑपरेशन के अधिक खर्चे के कारण उसे सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दी। हालांकि, अगले दिन मरीज के बेटे ने डॉक्टर को फोन करके बताया कि वे मुंबई के एक निजी अस्पताल में सर्जरी करवाएंगे। बताया कि, 'अगले दिन, मरीज के बॉस ने आरटीजीएस के माध्यम से सीधे आवश्यक धनराशि ट्रांसफर कर दी। सफल सर्जरी के बाद, मैंने उनके बॉस को फोन करके बताया आपके सहयोग के लिए धन्यवाद, मिस्टर की सर्जरी सफल रही।'  

'मेरे सहकर्मी का ध्यान रखने के लिए थैंक्स'

दावा है कि, बॉस ने डॉक्टर से फोन पर कहा, 'डॉक्टर साहब मेरे सहकर्मी का इतना अच्छा ख्याल रखने के लिए धन्यवाद।' आश्चर्यचकित होकर मिश्रा ने उस व्यक्ति से पूछा, 'सहकर्मी? लेकिन उन्होंने तो बताया था कि वे आपके ड्राइवर के रूप में काम करते हैं।' तब उस व्यक्ति ने कहा, 'वह 15 साल से मेरे साथ है, और मैं उसे सिर्फ अपना ड्राइवर नहीं मानता। मैं काम करता हूं, और वह भी काम करता है। हम दोनों की दैनिक जीवन में भूमिकाएं अलग-अलग हैं, लेकिन हम साथ मिलकर काम करते हैं। उसका काम मुझसे अलग है, लेकिन हम सहकर्मी हैं।' इस प्रतिक्रिया से डॉक्टर पूरी तरह से अवाक रह गए। उन्होंने याद किया कि इससे उन्हें एक सबक मिला। वे लिखते हैं कि, 'अपने घरेलू सहायकों या कर्मचारियों को कभी भी सिर्फ "नौकर" समझकर नीचा न दिखाएँ। वे ही हैं जो हमारी ज़िंदगी को सुचारू रूप से चलाते हैं, और वे समान सम्मान और गरिमा के पात्र हैं।'

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि, 'मैंने अपनी घरेलू सहायिका के लिए एसआईपी शुरू किया है, इस उम्मीद से कि एसआईपी की रकम बढ़ेगी और जब वे 10-12 साल बाद मेरी नौकरी से सेवानिवृत्त होंगी, तो मैं उन्हें एकमुश्त राशि दे सकूंगा। जिस तरह हम वेतनभोगी लोगों को सेवानिवृत्ति निधि मिलती है मैं चाहता हूं कि मेरी घरेलू सहायिका को भी वही मिले।'

दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'बिल्कुल सही, डॉक्टर! इसे बहुत कम लोग समझ पाएंगे... हमारा समाज ऐसी नींव पर खड़ा है जिसमें श्रम की गरिमा का अभाव है, बहुत पहले भी और अब भी!'

तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'अमूल्य और दिल को छू लेने वाला अनुभव।'

चौथे यूजर ने लिखा कि, 'थोड़ी सी गरिमा, कृतज्ञता और दयालुता दुनिया को बहुत बेहतर जगह बना सकती है।'

गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने अपनी बॉस द्वारा दिए गए गिफ्ट का वीडियो बनाकर शेयर किया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। 

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