भारतीय कार्य संस्कृति लंबे काम के घंटे, वीकेंड पर कॉल, छुट्टियों में भी उपलब्ध रहना और बॉस की ‘जी हुजूरी’ संस्कृति के कारण आलोचना का शिकार हो रही है। वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और युवाओं में बर्नआउट बढ़ने से ग्लोबल टैलेंट इसे पुरानी और तनावपूर्ण बता रहा है। कई कंपनियां अब हाइब्रिड मॉडल और वेलनेस पॉलिसी अपनाकर बदलाव की कोशिश कर रही हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट पर भी देखने को मिल रहा है। व्यक्ति ने अपने और अपने मैनेजर के बीच हुई बातचीत को शेयर किया, जिसने एक बार फिर भारतीय वर्कप्लेस पर कार्य-जीवन संतुलन और सहानुभूति की कमी पर बहस छेड़ दी है।
बीमार दादी से मिलने के लिए नहीं मिली छुट्टी
एक्स पर इस पोस्ट को @ltz_Krish नामक हैंडल से शेयर किया गया है। X सोशल मीडिया पर कवि कृष्णन नाम के एक व्यक्ति ने अपने मैनेजर के साथ हुई व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी दादी की हालत गंभीर है और उन्होंने तीन दिन की छुट्टी का अनुरोध किया। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “हाय मैम, मैं कवि कृष्णन हूं। मेरी दादी की हालत गंभीर है, इसलिए मुझे तीन दिन की छुट्टी चाहिए।” एक घंटे से अधिक समय बाद, मैनेजर ने एक संक्षिप्त संदेश के साथ जवाब दिया, "अचानक तुम पूछ रहे हो।" उन्होंने मैनेजर के संदेश के बाद हुई उनकी बातचीत के बारे में नहीं बताया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि इस घटना ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि भारतीय कार्यस्थलों में सहानुभूति की कमी है। पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने अपनी दादी के निधन का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, 'मेरी दादी की हालत गंभीर थी, इसलिए मैंने तीन दिन की छुट्टी मांगी। मेरे मैनेजर ने जवाब दिया, अचानक क्यों मांग रहे हो?... और अभी-अभी उनका निधन हो गया। कुछ लोगों में बुनियादी सहानुभूति की भी कमी होती है।'
'भारतीय मैनेजर घटिया हैं'
इस पोस्ट ने प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोकप्रियता हासिल की, जिससे भारत में वर्क कल्चर की व्यापक आलोचना हुई। एक यूजर ने लिखा कि, 'यह वाकई घिनौना है… जब मैंने छुट्टी के लिए फोन किया तो मेरे मैनेजर ने मुझसे कहा कि मैं अपने चाचा के निधन के कारण छुट्टी लेने के लिए एक प्रारंभिक रिपोर्ट भेजूं।'
दूसरे ने लिखा कि, 'आपको जवाब देना चाहिए था, मौत आने से पहले कभी दस्तक नहीं देती, महोदया।'
तीसरे ने लिखा कि, 'कॉर्पोरेट जगत में सबसे खराब मैनेजर बूमर पीढ़ी के होते हैं, जो अभी भी 90 के दशक की मानसिकता में फंसे हुए हैं। और यह शर्म की बात है कि आपने यह नहीं बताया कि वह व्यक्ति वास्तव में कौन था। आपके नुकसान के लिए मुझे खेद है!'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'यह मुझे मेरे पूर्व बॉस की याद दिलाता है; जब मैंने कहा कि मेरी दादी का निधन हो गया है, तो उन्होंने मुझसे पूछा, 'क्या आपको जाना ही है?'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'भारतीय प्रबंधक बिल्कुल ही घटिया हैं। मैंने दो साल पहले रूसी प्रबंधकों के अधीन काम किया था, और वे हमारी ज़रूरतों के प्रति बहुत सहानुभूति रखते थे, हालाँकि ऊपरी तौर पर उनका लहजा कठोर होता था। वहीं यूरोपीय प्रबंधक उनसे कहीं बेहतर हैं। किसी भी भारतीय इंजीनियर से पूछिए, वे भारतीय प्रबंधक के अधीन काम करना नापसंद करते हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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