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घरों की आसमान छूती कीमतों पर शख्स ने दी प्रतिक्रिया, कहा- 'खरीदने की क्षमता खोकर अब ज्यादा खर्च कर रहा हूं'

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Aug 06, 2026 12:01 pm IST,  Updated : Aug 06, 2026 12:01 pm IST

सोशल मीडिया पर एक शख्स की पोस्ट ने कई यूजर्स का ध्यान आकर्षित किया है। इसमें उसने दावा किया कि, घर खरीदने की क्षमता खोकर वह अब ज्यादा खर्च कर रहा है।

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शख्स की पोस्ट वायरल। Image Source : PEXELS

महानगरों में अपना घर खरीदना अब आम मिडिल-क्लास प्रोफेशनल्स के लिए लगभग असंभव सा बन गया है। प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतों और धीमी वेतन वृद्धि के बीच एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपनी मनोदशा साझा की है। प्रणव नाम के इस यूजर ने लिखा कि जब उन्हें एहसास हुआ कि मौजूदा आय से किसी मेट्रो शहर में अच्छा घर खरीदना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है, तब से वे पहले से ज्यादा खर्च करने लगे हैं।

एक्स पर शेयर की पोस्ट 

इस पोस्ट को एक्स पर @PranavaBhardwaj नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इन्होंने पोस्ट में लिखा कि, 'मुझे नहीं पता कि इसका कोई मनोवैज्ञानिक शब्द है या नहीं। लेकिन जब से मुझे समझ में आया कि मेरी वर्तमान आय से किसी भी मेट्रो शहर में आराम से अच्छा घर खरीदना लगभग असंभव है, तब से मैं ज्यादा खर्च करने लगा हूं। घड़ियां, गैजेट्स, जूते और चश्मे जैसी चीजों पर पैसा खर्च कर रहा हूं, जिन्हें पहले शायद खर्च नहीं करना चाहिए था।' प्रणव ने कहा कि वह अपने आसपास के कुछ अन्य लोगों को जानता था जो उसी पैटर्न का अनुसरण कर रहे थे, जिसे उन्होंने 'निराशाजनक अर्थव्यवस्था' का एक भयावह लक्षण बताया। उन्होंने कहा, 'जब व्यवस्था बड़े सपनों को कुचल देती है, तो समाज छोटे सपनों में सुख तलाशने लगता है। यह प्रवृत्ति कई रूपों में दिखाई दे रही है। बहुत से कपल ड्यूल इनकम-नो किड्स वाला पैटर्न फॉलो कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें भारत में अपने बच्चों का कोई भविष्य नजर नहीं आता, न सामाजिक रूप से, न ही आर्थिक रूप से।' 

लग्जरी चीजों पर कर रहे खर्च 

प्रणव बताते हैं कि, वे अपना पैसा यात्रा, आलीशान पर्स और महंगे फोन पर खर्च करना ज्यादा पसंद करते हैं। उनका मानना है कि, 'अगर आप सचमुच अमीर नहीं बन सकते, तो कम से कम अपने जीवनकाल में अमीर होने का एहसास तो करें। मुझे लगता है कि इसके पीछे यही मनोविज्ञान है।' प्रणव ने कहा कि, 'यह पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक समृद्ध दिखती है, लेकिन वास्तव में यह गरीब है और आर्थिक रूप से कहीं कम सुरक्षित है। अगर यही सिलसिला जारी रहा, तो भारत में अमीर दिखने वाले गरीब लोगों की एक पूरी पीढ़ी होगी, जिन्हें खुद यह नहीं पता होगा कि सेवानिवृत्ति के बाद वे अपना गुजारा कैसे करेंगे।' 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया 

इस पोस्ट को देखने के बाद कई लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा कि, 'मुझे लगता है कि आज की पीढ़ी को मेट्रो शहर में घर खरीदने का सपना छोड़ देना चाहिए। टियर-3 शहरों या अपने गांव में घर खरीदना बेहतर है।'

दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि कई लोग कर्ज लेकर ऐसा कर रहे हैं।' 

तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'यह वास्तव में बहुत दुखद है। हमारे देश में आज जीवन की गुणवत्ता में सबसे बड़ी बाधा अचल संपत्ति की बढ़ी हुई कीमतें हैं।'

चौथे यूजर ने लिखा कि, 'बिल्कुल सही, हम सभी के खर्च का स्तर बढ़ गया है और परिणामस्वरूप बचत कम हो गई है या कभी-कभी शून्य हो गई है। इंफ्लेशन इसका मुख्य कारण है, और साथ ही कंपनियों द्वारा विभिन्न विज्ञापनों के माध्यम से पैदा की गई महत्वाकांक्षी मांगें भी इसका एक कारण हैं।'

गौरतलब है कि, बेंगलुरु में बढ़ती मकानों से तंग आकर शख्स ने वीडियो शेयर किया था। इसमें इसने खुद को बेबस बताया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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