रत में मर्सिडीज या बीएमडब्ल्यू जैसी कारें अक्सर अमीरी और विलासिता का प्रतीक मानी जाती हैं। लेकिन अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय व्यक्ति संजय दसलानिया ने इस धारणा को तोड़ते हुए कहा है कि वहां कार रखना जरूरत है, विलासिता नहीं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण कार के बिना कहीं जाना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है, “अगर अमेरिका में आपके पास ‘पैर’ हैं, तो वह आपकी कार है; अन्यथा आप कहीं जा ही नहीं सकते।”
इंस्स्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sanjaydaslaniya01 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में वे बोले कि, “दूर से देखने पर मुझे लगता था कि अमेरिका में लोग कितनी शानदार जिंदगी जीते हैं! लेकिन यहां आने के बाद पता चला कि यहां मामूली, छोटी-मोटी नौकरियां करने वाले लोग भी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू जैसी कारें रखते हैं, जिन्हें भारत में लग्जरी कार कहा जाता है। यहां ये पूरी तरह आम हैं। हालांकि, इसका अमीर या रईस होने से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यूयॉर्क, शिकागो और कुछ बड़े शहरों को छोड़कर बाकी जगहों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट लगभग न के बराबर है।
कैब से करना पड़ता है संघर्ष
उन्होंने बताया कि काम पर जाने के लिए या तो अपनी कार होनी चाहिए या कैब या रेंटल कार लेनी पड़ती है, जो बहुत महंगी पड़ती है। अपने शहर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बस एक घंटे में सिर्फ एक बार आती है, और वह भी एक ही रूट पर। अगर मिस हो जाए तो एक घंटा इंतजार करना पड़ता है। शनिवार-रविवार को तो यह और भी कम हो जाती है। ऐसे में कार रखना विलासिता नहीं, बल्कि जिंदगी की बुनियादी जरूरत बन जाती है।
'कार रखना अमीरी का संकेत नहीं'
कैप्शन में दसलानिया ने और विस्तार से समझाया, “अमेरिका में कार = धन? हकीकत काफी अलग है! अमेरिका में कार रखना हमेशा अमीरी का संकेत नहीं होता। कभी-कभी यह सिर्फ जरूरत होती है। न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे बड़े शहरों के बाहर कई अमेरिकी कस्बों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सीमित है। अगर बस मिस हो जाए तो काम, किराने की दुकान, डॉक्टर के पास या स्कूल जाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए चाहे कोई सिक्योरिटी गार्ड हो, स्टूडेंट हो या मिनिमम वेज वर्कर, कार अक्सर विलासिता नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत होती है। सड़क पर दिखने वाली मर्सिडीज या बीएमडब्ल्यू भी इस्तेमाल की हुई या किस्तों पर खरीदी हुई हो सकती है।”
भारतीयों के लिए चौंकाने वाला अनुभव
यह अनुभव कई भारतीयों के लिए चौंकाने वाला है। भारत में ऑटो, बस, मेट्रो या ई-रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन अमेरिका के ज्यादातर इलाकों में दूरी ज्यादा होती है और पैदल चलना व्यावहारिक नहीं। कार के बिना रोजमर्रा के काम जैसे किराना खरीदना या ऑफिस जाना मुश्किल हो जाता है। दसलानिया ने जोर दिया कि दूर से देखने वाली तस्वीर और जमीन पर रहने का अनुभव दोनों में बहुत फर्क है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कई यूजर्स ने इससे सहमति जताई और कहा कि अमेरिका में कार के बिना जिंदगी रुक सी जाती है। कुछ ने बताया कि इस्तेमाल की हुई लग्जरी कारें वहां सस्ती मिल जाती हैं, इसलिए आम लोग भी उन्हें खरीद लेते हैं। वहीं कुछ ने भारत की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की तारीफ की, जहां विकल्प ज्यादा हैं। एक यूजर ने लिखा कि, 'इससे यह बात समझ में आती है कि वहां लगभग हर किसी के पास कार क्यों होती है।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'वहां कार रखना विलासिता से ज़्यादा ज़रूरत की चीज लगती है।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'वास्तविकता अक्सर दूर से दिखने वाली चीज़ों से बहुत अलग होती है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'अमेरिका में जीवन के बारे में यह एक दिलचस्प दृष्टिकोण है।"
गौरतलब है कि, इससे पहले US में कार के बिना होने वाली दिक्कतों के बारे में बताती महिला का वीडियो वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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