अमेरिका में रहने वाली भारतीय महिला दृष्टि बलदेवा ने हाल ही में एक वायरल वीडियो के माध्यम से भारत और अमेरिका के बीच परिवहन व्यवस्था के बड़े अंतर को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि भारत में कार को अक्सर लग्जरी या स्टेटस सिंबल माना जाता है, लेकिन अमेरिका में यह ‘सर्वाइवल नीड’ यानी जीवन रक्षा की आवश्यकता बन जाती है। उनका साफ कहना है कि “कार न होना घर में कैद होने (हाउस अरेस्ट) के बराबर है।”
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @ca.drishtibaldeva नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में महिला ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया, “भारत में मैं कार को लग्जरी समझती थी, लेकिन अमेरिका आने के बाद महसूस हुआ कि यह लग्जरी नहीं, बल्कि सर्वाइवल नीड है। भारत में हर दो मिनट में रिक्शा, बस, ई-रिक्शा, मेट्रो या कोई न कोई साधन मिल जाता है कहीं भी जाने के लिए।”
'किराने के सामान लेने के लिए जाना पड़ता है 10 किमी दूर'
अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी पर उन्होंने जोर दिया। न्यूयॉर्क जैसे कुछ बड़े शहरों को छोड़कर बाकी जगहों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट लगभग न के बराबर है। बस का इंतजार 45 मिनट तक करना पड़ सकता है और पैदल चलने की सुविधा (वॉकबिलिटी) बहुत कम है। रोजमर्रा के काम भी दूर-दूर फैले होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किराने का सामान लेने के लिए भी 10 मील (लगभग 16 किलोमीटर) ड्राइव करनी पड़ती है। अगर रोज उबर जैसी सेवा का इस्तेमाल करें तो रोजाना 50 से 60 डॉलर का खर्च आ जाता है, जो लंबे समय तक सस्टेनेबल नहीं।
'युवाओं के लिए कार खरीदना जरूरी'
महिला के अनुसार, अमेरिका पहुंचने वाले छात्रों या इंजीनियरों के लिए भी एक महीने के अंदर ड्राइविंग सीखना और कार खरीदना जरूरी हो जाता है। चाहे कोई भी प्रोफेशन हो, बिना कार के स्वतंत्र रूप से घूमना-फिरना, काम पर जाना, खरीदारी करना या जरूरी काम निपटाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि अमेरिका में कार न होना घर में कैद के समान है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो पर यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और उनकी बातों से सहमत हुए। एक यूजर ने लिखा, "अमेरिका में कार एक तरह से जरूरत बन चुकी है।"
दूसरे ने टिप्पणी की, "अमेरिका कारों के इर्द-गिर्द ही बना है।"
एक तीसरे यूजर ने कहा, "अमेरिका में नए आने वालों को यह बात पता होनी चाहिए।"
एक और यूजर ने इस अनुभव से सहमति जताते हुए लिखा, "यह बिल्कुल सच है।"
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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