Highlights
- सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद को रात में सील किया गया, सुबह बुलडोजर से ध्वस्तीकरण शुरू हुआ।
- जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की।
- सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका गया, इमरान मसूद बोले- हाई कोर्ट जाएंगे।
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद के एक हिस्से पर शनिवार सुबह बुलडोजर कार्रवाई की गई। प्रशासन ने रात में मस्जिद को सील करने के बाद सुबह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। सभी प्रवेश मार्ग बंद कर दिए गए और इलाके में हाई अलर्ट जैसा माहौल रहा।
अदालत के फैसले के बाद हुआ एक्शन
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश और उसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिका पर जिला अदालत के फैसले के बाद की गई है। गुरुवार को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। अदालत ने विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना था।
रात में मस्जिद सील, सुबह चला बुलडोजर
प्रशासन की टीम ने शुक्रवार देर रात कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को सील कर दिया था। इसके बाद शनिवार सुबह बुलडोजर मौके पर पहुंचा और मस्जिद के उस हिस्से को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई, जिसे प्रशासन सरकारी जमीन पर बना हुआ मानता है। कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट के सभी एंट्री पॉइंट बंद कर दिए गए। मौके पर एडीएम और नगर निगम की टीम मौजूद रही। सुरक्षा के लिए 10 से ज्यादा थानों की पुलिस के साथ पीएसी भी तैनात की गई। प्रशासन ने लोगों की नाराजगी और संभावित विरोध को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी है।
आखिर क्या है मस्जिद से जुड़ा पूरा मामला?
पिछले महीने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को अवैध मानते हुए उसे खाली कराने और ध्वस्तीकरण से जुड़ा आदेश दिया था। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला जज की अदालत का रुख किया था और कार्रवाई पर रोक की मांग की थी। गुरुवार को जिला जज की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने रात में मस्जिद को सील कर दिया और अगले दिन सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
'खाली करने का आदेश था, तोड़ने का नहीं'
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को खाली करने का आदेश दिया था, उसे गिराने का नहीं। पक्ष की ओर से अब जिला अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की तैयारी की जा रही है। पूर्व सांसद फजलुर्रहमान ने भी प्रशासन से जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब मस्जिद को खाली कराने के मामले में हाई कोर्ट में मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उनका कहना था कि मस्जिद पक्ष के पास अदालत में अपनी बात रखने के लिए अभी करीब 22 दिन का समय बाकी है।
'हाई कोर्ट जाएंगे, लोगों से शांति की अपील'
मस्जिद के ध्वस्तीकरण से पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मुस्लिम पक्ष इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाएगा। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इमरान मसूद का दावा है कि विवादित जमीन के रिकॉर्ड में वाहिद खान और याकूब खान के नाम दर्ज हैं और ये नाम पुराने समय से चले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे राजस्व रिकॉर्ड और धार्मिक स्थल के लंबे समय से मौजूद होने की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका गया
कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। बताया जा रहा है कि देर रात उनके कैराना स्थित आवास पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और उन्हें घर से बाहर निकलने से रोका गया। इकरा हसन के मुताबिक, वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और पूरे मामले की जानकारी लेना चाहती थीं। मस्जिद पर कार्रवाई के दौरान सहारनपुर कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। (सहारनपुर से खालिद हसन के इनपुट के साथ)
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