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सामने पत्नी का शव, आंखों में बेबसी और पास बैठी रोती मासूम बेटी... बारिश में घंटों मदद का इंतजार करता रहा पति

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 04, 2026 11:37 pm IST,  Updated : Sep 04, 2026 11:37 pm IST

यूपी के झांसी से एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जहां पत्नी की मौत का सदमा झेल रहे पति एक गरीब व्यक्ति के पास उसके शव को घर ले जाने के लिए भी पैसे नहीं थे। इस दौरान 8 साल की बेटी भी अपनी मां के शव को देखकर बिलखती रही।

बारिश में स्ट्रेचर के...- India TV Hindi
बारिश में स्ट्रेचर के पास बैठा रहा पति, मां को देख रोती रही बेटी। Image Source : REPORTER INPUT

झांसी मेडिकल कॉलेज से सामने आई एक तस्वीर ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्नी की मौत के बाद एक गरीब पति के पास शव को घर ले जाने तक के पैसे नहीं थे। मजबूर पति बारिश के बीच स्ट्रेचर पर रखे पत्नी के शव के पास बैठा रहा। करीब 8 साल की बेटी भी अपनी मां के शव को देखकर बिलखती रही। घंटों तक मदद की आस में बैठे बाप-बेटी पर किसी की नजर नहीं पड़ी। इसी दौरान वहां से गुजर रहे यूपी पुलिस के एक सिपाही ने जब यह दर्दनाक मंजर देखा, तो उसने मामले की जानकारी ली और एंबुलेंस की व्यवस्था कराकर शव को घर भिजवाया।

ये है पूरा मामला

मामला झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का है। मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के नकटा गांव के रहने वाले राहुल आदिवासी की पत्नी रामवती काफी समय से बीमार चल रही थी। राहुल अपनी पत्नी को इलाज के लिए ओरछा अस्पताल लेकर पहुंचा था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने रामवती को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

पत्नी चली गई, शव घर ले जाने को पैसे नहीं

राहुल के मुताबिक, उसके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, ऐसे में किसी तरह पैसे की व्यवस्था कर वह टैक्सी के जरिए पत्नी को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा। उसके साथ उसकी करीब 8 साल की बेटी नंदनी भी थी। मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने रामवती को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को स्ट्रेचर पर रखकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। लेकिन परिवार के पास शव को वापस गांव ले जाने का कोई साधन नहीं था और न ही इसके लिए पर्याप्त पैसे थे।

करीब एक घंटे तक पिता-पुत्री मदद की उम्मीद में बैठे रहे।
Image Source : REPORTER INPUTकरीब एक घंटे तक पिता-पुत्री मदद की उम्मीद में बैठे रहे।

मां को देख रोती रही मासूम बेटी

पत्नी की मौत का सदमा झेल रहे राहुल के सामने अब एक और मजबूरी खड़ी हो गई। वह शव को स्ट्रेचर पर लेकर मेडिकल कॉलेज परिसर में वाहन स्टैंड की छत के नीचे बैठ गया। बाहर बारिश हो रही थी और सामने स्ट्रेचर पर पत्नी का शव रखा था। पास ही बैठी मासूम बेटी नंदनी अपनी मां को देखकर लगातार रो रही थी।

पुलिसकर्मी ने की मदद

बताया जा रहा है कि करीब एक घंटे तक पिता-पुत्री इसी तरह मदद की उम्मीद में बैठे रहे। उनकी आंखें किसी ऐसे शख्स को तलाश रही थीं, जो इस मुश्किल वक्त में उनका सहारा बन सके। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी की नजर स्ट्रेचर पर बैठे राहुल और उसकी बेटी पर पड़ी। सिपाही ने उनके पास जाकर पूरी जानकारी ली। जब उसे पता चला कि परिवार के पास शव को घर ले जाने के लिए पैसे नहीं हैं, तो उसने मदद का फैसला किया। सिपाही ने एंबुलेंस की व्यवस्था कराई और शव को घर भिजवाने का इंतजाम किया।

वहीं, मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि जिन परिजनों के पास शव ले जाने की व्यवस्था नहीं होती, उनके लिए मेडिकल कॉलेज की ओर से शव वाहन उपलब्ध कराया जाता है। संभव है कि संबंधित परिजन ने अपनी परेशानी मेडिकल स्टाफ को नहीं बताई हो।

हाल ही में झारखंड के गुमला जिले से भी ऐसा ही एक स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला  मामला सामने आया था। 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली शिवानी कुमारी ने समय पर एंबुलेंस और ऑक्सीजन न मिलने के कारण अपने माता-पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया था।

(रिपोर्ट- आकाश राठौड)

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