अमेरिका में रहने वाले भारतीय ने वहां के वर्कप्लेस में सीखीं ये 5 आदतें, लिंक्डइन पर शेयर की गई पोस्ट हो रही वायरल
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय शख्स की पोस्ट काफी वायरल हो रही है। जिसने अमेरिका के वर्कप्लेस में सीखी 5 आदतों को लिंक्डइन पर शेयर किया है।

अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए गए एक भारतीय प्रोफेशनल ने लिंक्डइन पर वहां के वर्कप्लेस कल्चर से सीखी गई पांच महत्वपूर्ण आदतें साझा की हैं। अनुष्क एस. की यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका आने के बाद कल्चर शॉक का अनुभव हुआ, लेकिन कुछ सालों में उन्होंने ऐसी आदतें देखीं जो हर प्रोफेशनल सीख सकता है। पोस्ट की शुरुआत में अनुष्क ने लिखा, 'जब मैं उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका आया तो पहला अनुभव कल्चर शॉक का था। यहां काम करने का तरीका घर से बिल्कुल अलग था।' कुछ साल बिताने के बाद उन्होंने पांच सबक सूचीबद्ध किए।
लिंक्डइन पर शेयर की पोस्ट
इस पोस्ट को लिंक्डइन पर @AnushkS. नामक हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में लिखा है कि, "यहां कुछ साल बिताने के बाद, मैंने वर्कप्लेस की कुछ ऐसी आदतों पर ध्यान दिया है जिन्हें अमेरिका बहुत अच्छे से अपनाता है। ये ऐसी आदतें हैं जिनसे दुनिया भर के पेशेवर सीख सकते हैं। अगर मुझे अपने साथ पांच सबक लेकर जाना हो, तो वे यही होंगे।'
समय की पाबंदी सबसे अहम
अनुष्क ने पहली आदत के बारे में बताया कि, 'समय को गंभीरता से लिया जाता है,' और आगे कहा कि अमेरिका उस चीज़ पर काम नहीं करता जिसे वह मज़ाकिया तौर पर 'भारतीय फ्लेक्सिबल समय' कहते हैं। उन्होंने कहा, 'लोग आपके समय का सम्मान करते हैं, और आपसे भी यही अपेक्षा करते हैं कि आप उनके समय का सम्मान करें। बैठकें समय पर शुरू होती हैं, समयसीमा का महत्व होता है, और देर से आने को शायद ही कभी हल्के में लिया जाता है। यह अनुशासन दिखावटी नहीं है। इसी से विश्वास बनता है।'
'कैजुअल अप्रोच को ना'
उनका दूसरा बिंदु तैयारी पर केंद्रित था। "देख लेंगे" मुहावरे का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि पेशेवर लोग आमतौर पर बैठकों में आने से पहले अपना होमवर्क करते हैं, संदर्भ को समझते हैं और संभावित चुनौतियों के लिए तैयारी करते हैं। जुगाड़ को एक मूल्यवान कौशल बताते हुए उन्होंने कहा कि आदर्श रूप से तैयारी ऐसी स्थितियों को रोकनी चाहिए जहां इसकी आवश्यकता हो।
जवाबदेही
अनुष्क ने बताया कि, 'हर कोई जानता है कि उनकी क्या ज़िम्मेदारी है। इस बात को लेकर कोई उलझन नहीं होती कि काम किसके ज़िम्मे है, फ़ैसला कौन लेगा और नतीजा कौन देगा। लोग अपने काम पर गर्व करते हैं क्योंकि जिम्मेदारी पांच विभागों के बीच कहीं हवा में नहीं लटकी रहती।'
फीडबैक का मतलब निजी दुश्मनी नहीं
उनका अपनी सबसे बड़ी सीख के बारे में लिखा कि, 'यहां अच्छा फीडबैक आमतौर पर खास, काम का और अक्सर आमने-सामने दिया जाता है। ध्यान काम को बेहतर बनाने पर होता है, न कि व्यक्ति को नीचा दिखाने पर। आप कड़ा विरोध भी कर सकते हैं और फिर भी आपसी सम्मान बनाए रख सकते हैं।'
पक्के सबूत का इंतजार न करें
अनुष्क बताते हैं कि, 'अमेरिका में लोग काम शुरू करने से पहले हमेशा पक्के सबूत का इंतजार नहीं करते। एक मजबूत आइडिया, साफ़ विजन और सही लोगों को मनाने की काबिलियत ही शुरुआत करने के लिए काफ़ी हो सकती है। प्रोडक्ट को टेस्ट किया जाता है, प्लान में बदलाव होते हैं और काम करते-करते ही चीजें साफ़ होती जाती हैं। पहला कदम उठाने से पहले हर केस स्टडी, हर मंज़ूरी और हर सवाल का जवाब पाने का जुनून कम होता है।'
भारत और अमेरिका के बारे में कही ये बात
पोस्ट के अंत में, अनुष्क ने इस बात पर विचार किया कि दोनों देशों में रहने से उनके दृष्टिकोण को किस प्रकार आकार मिला। उन्होंने लिखा, "इन आदतों ने काम के प्रति मेरे सोचने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। भारत ने मुझे लचीलापन, अनुकूलनशीलता और सीमित संसाधनों के साथ अवसर पैदा करना सिखाया। अमेरिका ने मुझे सिखाया कि तैयारी, जिम्मेदारी, ईमानदार प्रतिक्रिया, समय का सम्मान और जल्दी कदम उठाने के साहस के साथ इन गुणों को कितनी दूर तक ले जाया जा सकता है।"
गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने अमेरिका में 1 करोड़ के पैकेज की सच्चाई बताई थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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