अमेरिका में काम कर रहे भारतीय युवक युवान इबानेज गारवारे का इंस्टाग्राम वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने भारत और अमेरिका में अपने स्वास्थ्य संबंधी अनुभवों की तुलना करते हुए बताया कि हेल्थकेयर सिस्टम एक प्रमुख कारण है जिसकी वजह से वे भारत लौटना चाहते हैं। वीडियो में उन्होंने साफ कहा, “मैं एक शब्द की वजह से अमेरिका से भारत लौट रहा हूं: हेल्थकेयर।”
इंस्टाग्राम पर शेयर किय गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @yuvaanibanez नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में शख्स ने पहले भारत में हुए अनुभव का जिक्र किया। कुछ साल पहले वे कई बार बेहोश हो गए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां बिना किसी पेपरवर्क के तुरंत प्राइवेट रूम मिला। डॉक्टरों ने ईसीजी, एमआरआई, सीटी स्कैन और ब्लड टेस्ट सहित कई जांचें कीं। वे जब चाहें डॉक्टर से बात कर सकते थे। कुछ दिनों बाद उन्हें साफ निदान और इलाज का प्लान मिला। पूरे इलाज का बिल करीब 500 डॉलर यानी लगभग ₹47,000 आया।
'अमेरिका का एक्सपीरिएंस बहुत बुरा'
इसके बाद उन्होंने अमेरिका में हुई मेडिकल इमरजेंसी का वर्णन किया। बास्केटबॉल खेलते समय उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। एंबुलेंस का खर्च बहुत ज्यादा होने के कारण उन्होंने उसे नहीं बुलाया। अस्पताल में पहुंचने के बाद भी डॉक्टर से आसानी से बात नहीं हो पाई। जांचें हुईं, लेकिन साफ निदान या फॉलो-अप प्लान नहीं मिला। आखिरकार बिल आया—23,000 डॉलर यानी करीब ₹22 लाख। उनके पास टॉप-लेवल इंश्योरेंस था, जिसके लिए वे हजारों डॉलर चुकाते थे, फिर भी जेब से करीब 7,000 डॉलर यानी लगभग ₹6.67 लाख देने पड़े। शख्स ने अमेरिकी सिस्टम पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने माना कि अमेरिका में मौसम और इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा की महंगाई और जटिलता उन्हें स्थायी रूप से बसने से रोक रही है। कमेंट्स में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भारतीय हैं और पुणे में 16 साल बड़े हुए।
कैसा है अमेरिका का मेडिकल सिस्टम?
विशेषज्ञों और कई प्रचलित रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम प्राइवेट इंश्योरेंस पर आधारित है, जहां डिडक्टिबल, को-पे और अप्रूवल प्रक्रियाएं आम हैं। भारत में प्राइवेट सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और कम ओवरहेड्स की वजह से कई सेवाएं किफायती रहती हैं। हालांकि, भारत में भी गुणवत्ता और पहुंच में क्षेत्रीय अंतर हैं। इबानेज गारवारे का तुलनात्मक अनुभव इन अंतरों को व्यक्तिगत स्तर पर उजागर करता है। वीडियो में उन्होंने जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा जीवन की गुणवत्ता तय करती है। अच्छी सैलरी और सुविधाएं होने के बावजूद अगर बीमार पड़ने पर आर्थिक बोझ और तनाव बढ़े, तो स्थायी निवास का फैसला बदल सकता है। कई एनआरआई स्वास्थ्य, परिवार और संतुलन को ध्यान में रखकर भारत लौटने पर विचार कर रहे हैं।
लोगों के बीच छिड़ी बहस
यह वीडियो भारतीय प्रवासियों और युवाओं में बहस छेड़ गया। कई लोगों ने अमेरिकी हेल्थकेयर की महंगाई और इंश्योरेंस की जटिलताओं से सहमति जताई। कुछ ने कहा कि भारत में प्राइवेट अस्पतालों की गुणवत्ता और पहुंच बेहतर महसूस होती है, खासकर इमरजेंसी में। वहीं कुछ यूजर्स ने याद दिलाया कि अमेरिका में तकनीक और विशेषज्ञता ऊंचे स्तर की है, लेकिन लागत आम आदमी के लिए भारी पड़ती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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