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एक भारतीय महिला ने यूरोपीय कपल से सीखे 5 पैरेंटिंग टिप्स, हर माता-पिता को जानने चाहिए ये सुझाव; Video

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय महिला का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला ने यूरोपीय कपल से सीखे 5 पैरेंटिंग टिप्स के बारे में बताया है।

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Image Source : IG/@DR.SUKHMANIGUMBER भारतीय महिला ने शेयर किया वीडियो।

एक महिला ने यूरोप की एक महीने की यात्रा के दौरान वहां के पैरेंट्स से सीखे गए व्यवहारिक पै​रेंटिंग टिप्स शेयर किए हैं, जो कि काफी वायरल हो रहे हैं। मातृत्व और स्वास्थ्य पर अक्सर लिखने वाली डॉ. सुखमनी गुंबर ने सोशल मीडिया पर बताया कि यूरोपीय पालन-पोषण शैली आधुनिक रुझानों से किस प्रकार भिन्न है। उनके विचार माता-पिता को यह याद दिलाते हैं कि बच्चों की परवरिश में अक्सर दैनिक दिनचर्या को सरल बनाना शामिल होता है। इंस्टाग्राम पर dr.sukhmanigumber नामक हैंडल से जो पांच महत्वपूर्ण पैरेंटिग टिप्स शे​​यर किए वे इस प्रकार हैं : 

बच्चों को अपनी दुनिया का केंद्र बनाना जरूरी नहीं

वयस्कों के साथ समय बिताने से बचने के बजाय, वह सुझाव देती हैं कि बच्चों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। उन्हें कैफे में खाना खाने या यात्रा करने जैसी रोज़मर्रा की गतिविधियों में शामिल करें। उन्होंने कहा, 'जितना ज़्यादा उन्हें शामिल किया जाएगा, उतना ही वे परिस्थितियों के अनुकूल ढलना सीखेंगे।'

ऊबना कोई बुरी बात नहीं है

आजकल जब बच्चे लगातार स्क्रीन देखते हैं और खेल-कूद में तय नियमों का पालन करते हैं, तो कई माता-पिता तब घबरा जाते हैं जब उनके पास करने के लिए कुछ नहीं होता। हालांकि, डॉ. गंबर बताती हैं कि खिलौने या फोन के बिना पांच से दस मिनट तक इंतजार करने से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'दरअसल, ऊबना और धैर्य रखना ऐसे जीवन कौशल हैं जो आजकल बहुत कम देखने को मिलते हैं।' 

खाने के शिष्टाचार

बच्चों का बचकाना व्यवहार करना स्वाभाविक है, लेकिन वे अपेक्षाओं को समझने में भी अत्यधिक सक्षम होते हैं। उन्होंने लिखा, 'मेज पर बैठना, सार्वजनिक स्थानों का सम्मान करना और अच्छे शिष्टाचार का अभ्यास करना हमारी सोच से कहीं पहले शुरू हो जाता है।'

खाने के डर को दूर करें

बच्चे आम तौर पर बड़ों की नकल करते हैं। आइसक्रीम या कुकीज़ जैसी चीज़ों पर पूरी तरह से रोक लगाने के बजाय, वह माता-पिता को संतुलन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देती हैं। वे बोलीं कि, 'खाने के प्रति डर से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है खाने के साथ संतुलित रिश्ता। और अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बेहतर खाना खाए, तो इसकी शुरुआत अक्सर आपकी अपनी थाली में मौजूद खाने से होती है।' 

बच्चों के नखरे को शर्मिंदगी का कारण बनने से रोकें

डॉ. गंबर ने यह भी देखा कि यूरोपीय माता-पिता सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों के नखरे कैसे संभालते हैं। जब बच्चे रेस्तरां में रोते थे, तो उनके माता-पिता बिना घबराहट या शर्मिंदगी दिखाए पूरी तरह शांत रहते थे। उन्होंने कहा, 'वे पहले भावनाओं को शांत होने देते हैं, फिर शांति से अपने बच्चे से बात करते हैं।'

गौरतलब है कि, 173,000 से अधिक बार देखे जाने के साथ उनकी पोस्ट काफी वायरल हुई। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। 

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