परिवार के बिना पैसा किसी काम का नहीं। अगर आपका परिवार आपके साथ नहीं है तो दुनिया की कोई भी जगह आपको सुख और शांति नहीं दे सकती। कुछ ऐसा ही हुआ जापान के टोक्यो में रहने वाले तेत्सु यामादा के साथ। यामादा अपनी पत्नी केइको और दो बच्चों के साथ टोक्यो में खुशहाल जीवन जी रहा था, लेकिन उसे शहर की जिंदगी ने बोर कर दिया था, जिसके बाद उसने फैसला किया कि वह रिटायरमेंट के बाद अपने पैतृक गांव लौट जाएगा और वहीं पर खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत करेगा।
रिटायरमेंट के बाद गांव में रहने का सपना
समय बीता और जब वह 60 साल का हो गया तो वह रिटायर हो गया। रिटायरमेंट के तौर पर उसे 2.96 करोड़ रुपये मिले, जिसके बाद उसने अपनी पत्नी को अपने साथ गांव चलने को कहा और उसे बोला कि वह चाहता है कि रिटायर होने के बाद वे दोनों अपने गांव लौटकर एक सादा और शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करें। लेकिन टोक्यो के शहरी जीवन की आदी हो चुकी केइको ने उसके इस प्लान को नाकार दिया और उसके साथ जाने से मना कर दिया। साथ ही, यामदा के दोनों बेटों ने भी टोक्यो की अपनी नौकरी छोड़कर वापस गांव जाने से मना कर दिया।
पत्नी ने साथ जाने से किया इनकार
इसके बाद यामादा और केइको के बीच तनाव बढ़ने लगा। जब तनाव बढ़ा तो केइको ने अपने पति यामदा को 'सोत्सुकोन' का विचार दिया। 'सोत्सुकोन' का मतलब ये होता है कि इसमें शादीशुदा कपल्स एक-दूसरे से अलग रहते हैं, लेकिन तलाक नहीं लेते। इस प्रथा को साल 2004 में एक जापानी लेखिका ने शुरू किया था। ये प्रथा जापान में बहुत मशहूर है। यामदा को पत्नी द्वारा दिए गए 'सोत्सुकोन' का विचार सही लगा, जिसके बाद उसने इस विचार पर अपनी हामी भर दी।
रिटायरमेंट का पैसा लेकर गांव लौट आया शख्स
तलाक के आसार के बीच निकले इस हल को मानते हुए यामादा अकेले अपने गांव लौट गया और साथ में वह अपने रिटायरमेंट का पैसा भी ले गया। उन पैसों से यामादा ने घर का रिनोवेशन करवाया और एक शांत जीवन जीने की कोशिश करने लगा। लेकिन जल्द ही उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वह घर के कामकाज और खाना बनाने जैसे आसान काम भी नहीं कर पा रहा था। नतीजा यह हुआ कि वह इंस्टेंट नूडल्स और फ्रोजन सब्जियों पर निर्भर हो गया। दूसरी ओर, उसकी पत्नी केइको टोक्यो में रहकर अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गई। पति के जाने के बाद उसने एक हस्तनिर्मित कार्यशाला शुरू की, जो बहुत सफल रही। यामादा ने सोशल मीडिया पर देखा कि केइको उनके बिना खुश और कामयाब है।
अकेलेपन से जूझने लगा शख्स
कुछ दिनों बाद यामादा को अकेलापन महसूस होने लगा। अब वह अपने फैसले पर पछता रहा था। उसका अपने बेटों के साथ भी रिश्ता कमजोर हो गया है। हालांकि वो और केइको कभी-कभार ऑनलाइन बात करते हैं, लेकिन अब यह साफ नहीं है कि यामादा टोक्यो लौटकर अपने परिवार के साथ फिर से रहेगा या नहीं।
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