मुंबई मेट्रो स्टेशन पर लगाए गए स्मार्ट ‘पीकदान’ (Spit Bin) की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इसे ‘दुनिया का पहला निर्धारित थूकने का स्थान’ बताया गया है, लेकिन मेट्रो के अपने नियमों में थूकने पर 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इस विरोधाभास ने एक अजीब सवाल खड़ा कर दिया है- थूकना मना है या फिर इसके लिए जगह बना दी गई है?
एक्स यूजर ने उठाया सवाल
एक्स यूजर @zoru75 ने गुंडावली मेट्रो स्टेशन पर लगे इस डिब्बे की तस्वीर शेयर की। कैप्शन में लिखा, “मेरी मुंबई मेट्रो, अब खास 'थूकने की जगहों' (Spitting Zones) के साथ।” तस्वीर में टचलेस स्पिट बिन दिख रहा है, जिस पर एमएमआरडीए और महा मुंबई मेट्रो के लोगो हैं। बोर्ड पर अंग्रेजी और मराठी में इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं। सेंसर से हाथ हिलाने पर ढक्कन खुलता है। संदेश है—“जिम्मेदार बनें।”
पीकदान के पीछे उद्देश्य
यह सुविधा ईजीस्पिट नाम की कंपनी की पहल बताई जा रही है, जो सार्वजनिक थूकने की समस्या के समाधान के लिए डिजाइन किए गए डिब्बे बनाती है। मकसद है कि लोग दीवारों, फर्श या अन्य जगहों पर थूकने की बजाय निर्धारित जगह का इस्तेमाल करें, जिससे स्टेशन साफ रहें। लेकिन मेट्रो नियमों से टकराव साफ है।
जुर्माने के बारे में जानें
मुंबई मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन (एमएमआरसी) की वेबसाइट पर उपलब्ध अपराध और जुर्माना सूची के अनुसार, धारा 59(1) में थूकना, उपद्रव, अशोभनीय व्यवहार या यात्रियों की सुविधा में बाधा डालने वाले कृत्य शामिल हैं। इसके लिए 500 रुपये जुर्माना, पास या टिकट जब्त करने और गाड़ी से बाहर निकालने का प्रावधान है। यही नियम अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कुछ यूजर्स ने इसे व्यावहारिक कदम बताया। उनका कहना है कि अगर लोग थूकते ही हैं तो नियंत्रित जगह देना बेहतर है, ताकि दीवारें और फर्श गंदे न हों। एक यूजर ने लिखा, “भारत में आधुनिक समस्याएं हैं, इसीलिए थूकने के लिए पहली निर्धारित जगह बनाई गई है।” कुछ ने इसे स्वच्छता बनाए रखने का तरीका करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "भारत में आधुनिक समस्याएं हैं, इसीलिए थूकने के लिए पहली निर्धारित जगह भारत में है।"
दूसरे ने कहा कि, 'यह सरासर गलत है। थूकना तो बिलकुल ही मना है। मैंने बेहद अमीर से लेकर बेहद गरीब तक लगभग 112 देशों का दौरा किया है, लेकिन दुनिया में कहीं भी मुझे एक भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर थूकते हुए नहीं मिला।'
तीसरे यूजर ने लिखा, "इस तरह का नवाचार बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था।"
चौथे ने लिखा कि, "मुझे लगता है कि यह एक बेहतर अल्पकालिक समाधान है क्योंकि यह एक व्यवहार संबंधी समस्या है। लेकिन हमें इस गंदगी को जड़ से खत्म करने के लिए दीर्घकालिक उपाय करने की जरूरत है।"
गौरतलब है कि, इससे पहले Delhi Metro में गुटखे के दाग से सनी सीट वायरल हुई थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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