गुरुग्राम के मार्केटिंग प्रोफेशनल शिव मित्तल की एक लिंक्डइन पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। इसमें उन्होंने अपनी घरेलू सहायिका की मासिक आय और उसके पैसे संभालने के तरीके का जिक्र किया। मित्तल के अनुसार, उनकी सहायिका हर महीने करीब 60,000 रुपये कमाती है और जिस तरह से वह इस आय का प्रबंधन करती है, वह ज्यादातर लोगों के लिए ‘रियलिटी चेक’ है।
लिंक्डइन पर शेयर की पोस्ट
इस पोस्ट को लिंक्डइन पर Shiva Mittal नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें शिव मित्तल ने बताया कि, उनकी घरेलू सहायिका रोजाना 5 से 6 घरों में काम करती है। महीने में सिर्फ 3-4 तय छुट्टियां लेती है। सुबह 7 बजे से पहले काम शुरू कर देती है। इतनी मेहनत से वह करीब 60,000 रुपये मासिक कमा लेती है। गुरुग्राम जैसे शहर में यह रकम कई लोगों को आश्चर्यजनक लग सकती है, लेकिन असली बात आय की नहीं, बल्कि उसके प्रबंधन की है।
Image Source : Linkedin/@Shiva Mittalलिंक्डइन पोस्ट वायरल।
पैसे का मैनेजमेंट कैसे करती है?
शख्स के अनुसार, मेड अपनी इनकम को बेहद सावधानी से खर्च करती है। इसमें शामिल है:
- बेटी की प्राइवेट स्कूल की पढ़ाई का खर्च।
- रोजमर्रा के घरेलू खर्च।
- 10,000 रुपये मासिक किराया (यूटिलिटीज अलग)।
- अपने होमटाउन में करीब 6 लाख रुपये की जमीन की EMI.
वे आगे लिखते हैं कि, “जो खर्च नहीं करते, वही बचत है...यह उनका सरल लॉजिक है। उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ जरूरतों पर चलती है। खुद के लिए कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं। सिर्फ बेटी का सुरक्षित और स्थिर भविष्य सुनिश्चित करना। और एकमात्र ईएमआई वह एसेट की है, जो बढ़ने वाली है और लंबे समय का सुरक्षा जाल है।”
कॉपोरेट दुनिया से तुलना
शख्स ने मेड के तरीके की तुलना आम सैलरीड प्रोफेशनल्स से की। उन्होंने कहा कि कई लोग घटते हुए एसेट्स (जैसे गाड़ी, गैजेट्स) पर भारी ईएमआई लेते हैं, सोसायटी में दिखाने के लिए लाइफस्टाइल अपग्रेड करते हैं। पर्सनल फाइनेंस किताबें पढ़ते हैं, बजटिंग ऐप्स डाउनलोड करते हैं, फिर भी पैसे लीक होते रहते हैं जबकि उनके पास कॉरपोरेट सेफ्टी नेट, इंश्योरेंस और बेनिफिट्स होते हैं। इसके विपरीत, मेड के पास कोई कॉरपोरेट सेफ्टी नेट, एंप्लॉयी बेनिफिट्स या इंश्योरेंस नहीं है। गलती की कोई गुंजाइश नहीं। कोई स्प्रेडशीट या जटिल प्लानिंग नहीं। सिर्फ स्पष्टता कि असल में क्या मायने रखता है, और हर सुबह 7 बजे से पहले काम पर पहुंचना। शख्स ने कहा कि इससे उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में असली वित्तीय अनुशासन पर फिर से सोचने का मौका मिला।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
पोस्ट वायरल होने के बाद लोग दो खेमों में बंट गए। कुछ ने सहायिका की मेहनत और समझदारी की तारीफ की। कई ने कहा कि असली फाइनेंशियल डिसिप्लिन यही है—जरूरतों पर फोकस और भविष्य के लिए निवेश। कुछ ने गुरुग्राम में घरेलू मदद की बढ़ती मजदूरी और मेहनत की चर्चा की।
गौरतलब है कि, इससे पहले महिला का मेड को एयर कूलर गिफ्ट करते वीडियो वायरल हुआ था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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