ऑफिस में देर तक बैठकर काम करना, थकान को नजरअंदाज करना और हर समय व्यस्त दिखना कई कर्मचारियों के लिए करियर ग्रोथ का फॉर्मूला माना जाता है। लेकिन हाल ही में इंस्टाग्राम पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस सोच को चुनौती दी है। फ्रेयाज श्रॉफ नाम की महिला ने साफ कहा है कि “कोई परवाह नहीं करता कि आप कितनी मेहनत करते हैं।” उनके अनुसार, प्रमोशन मेहनत के घंटों पर नहीं, बल्कि भरोसे, विश्वसनीयता और मूल्य पैदा करने पर निर्भर करता है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @teentotwenties नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में फ्रेयाज श्रॉफ ने अपने वीडियो में विस्तार से बताया कि ऑफिस में एफर्ट (प्रयास) और वैल्यू (मूल्य) दो अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा, “आप किसी काम पर 12 घंटे बिता सकते हैं, फिर भी सही नतीजा नहीं दे पाते। आप थके हुए, ओवरव्हेल्म्ड और बेहद व्यस्त हो सकते हैं, फिर भी आपके बॉस के मन में यह खयाल आ सकता है कि ‘मुझे नहीं पता कि मैं इस व्यक्ति को ज्यादा जिम्मेदारी सौंप सकता हूं या नहीं।’ क्योंकि करियर इस बात पर नहीं बनते कि आपने कितनी मेहनत की, बल्कि इस पर कि लोग आप पर क्या भरोसा करते हैं।”
'व्यस्त रहने और मूल्यवान होने में अंतर'
उन्होंने उन कौशलों को रेखांकित किया जो वास्तव में ध्यान आकर्षित करते हैं- डेडलाइन पूरा करना, बदलाव की स्थिति में साफ संवाद करना, समस्याओं का समाधान निकालना, फीडबैक लेना और बिना किसी की मदद के अच्छे फैसले लेना। श्रॉफ का संदेश साफ था: “करियर की शुरुआत में सबसे कठिन सबक यह है कि आप यह साबित करना बंद करें कि आप कितनी मेहनत कर रहे हैं। बल्कि ऐसा व्यक्ति बनें जिस पर लोग भरोसा कर सकें। कोई आपको इसलिए प्रमोट नहीं करेगा कि आप थके हुए हैं; वे आपको इसलिए प्रमोट करेंगे क्योंकि वे आपको बड़ी जिम्मेदारी सौंपने पर भरोसा करते हैं।” वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “ऑफिस में व्यस्त रहने और मूल्यवान होने में फर्क है। मूल्य जोड़ने का चुनाव करें।” यह बात कई कर्मचारियों के अनुभव से मेल खाती है, जहां लंबे घंटे काम करने वाले लोग अक्सर उसी पद पर अटके रह जाते हैं, जबकि भरोसेमंद और परिणाम देने वाले कर्मचारी आगे बढ़ते हैं।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें से अधिकांश कार्यस्थल पर विकास और करियर में तरक्की के बारे में श्रॉफ के विचारों से सहमत थे। एक यूजर ने लिखा, "यह एक कड़वा सच है।"
दूसरे ने टिप्पणी की, "काम के घंटों से ज़्यादा विश्वसनीयता मायने रखती है।"
तीसरे ने कहा, "यह वास्तव में करियर के लिए ठोस सलाह है।"
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए एक अन्य यूजर ने कहा, "काम पर भरोसा ही सब कुछ बदल देता है।"
गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने भारत और अमेरिका के ऑफिसों के वर्क कल्चर में अंतर बताए थे।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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