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फ्लैट पर महिला Colleague को बुलाने पर आया नोटिस, शख्स ने शेयर की फोटो तो सोशल मीडिया पर मचा बवाल

Viral Post : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में शख्स ने दावा किया है कि, फ्लैट पर महिला सहकर्मी को आमंत्रित करने पर उनको नोटिस मिला है।

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Image Source : FREEPIK फ्लैट पर महिला सहकर्मी को किया आमंत्रित।

Viral Post : भारत में कुछ अपार्टमेंट/हाउसिंग सोसाइटी में विपरीत लिंग के मेहमानों को बुलाने पर सख्त नियम या प्रतिबंध होते हैं। ये नियम ज्यादातर सोसाइटी कमिटी द्वारा बनाए जाते हैं और इनके पीछे कई वजहें हैं - कुछ व्यावहारिक, कुछ सांस्कृतिक, और कुछ कानूनी रूप से विवादास्पद। हालांकि, सोशल मीडिया पर एक इस बार विवाद तब देखने को मिला जब हैदराबाद के एक शख्स ने दावा किया कि उसे फ्लैट पर महिला सहकर्मी को आमंत्रित करने पर सोसायटी के सेक्रेटरी की ओर से नोटिस मिला है। शख्स ने नोटिस की तस्वीर रेडिट पर शेयर की, जहां इसने कानूनों और मौलिक अधिकारों पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि वे इस नोटिस को देखकर शॉक्ड हो गए क्योंकि वे और उनके दोस्त न तो तेज संगीत बजाते थे और न ही किसी भी तरह से अपने पड़ोसियों को परेशान करते थे।  

रेडिट पर शेयर की पोस्ट 

रेडिट पर इस पोस्ट को r/hyderabad नामक ग्रुप पर Ok-Cheetah-1026 हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में किराएदार ने रेडिट पर लिखा, 'पिछले महीने मैंने अपनी महिला सहकर्मी को नाश्ते, चाय और रात के खाने के लिए दो-तीन बार अपने अपार्टमेंट में बुलाया था और मुझे अपार्टमेंट के सचिव से यह नोटिस मिला। किसी को कोई परेशानी नहीं हुई, न ही तेज संगीत बजाया गया। समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूं।' नोटिस में अपार्टमेंट सचिव ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे इस तरह की गलती दोबारा न करें अन्यथा उन्हें अपार्टमेंट खाली करने के लिए कहा जा सकता है।

Image Source : Reddit रेडिट पर वायरल पोस्ट।

रेडिटर्स ने दी सलाह 

इस पोस्ट को देखने के बाद कई रेडिटर्स इस पर भड़क गए और उन्होंने किरायेदार को पलटवार करने की सलाह दी। एक ने लिखा कि, 'उनसे उक्त नियमों की वेरिफाई कॉपी साथ ही उन नियमों को अपनाने वाली मीटिंग का समय भी मांगें। इसके अतिरिक्त यह भी पूछें कि क्या सोसायटी के उपनियम/नियम/विनियम मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं।' दूसरे ने कहा कि, 'जब तक किराये के समझौते में इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख न हो, वयस्क आगंतुकों पर प्रतिबंध लगाना कानूनी रूप से संदिग्ध लगता है।' कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें भी इसी तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ा है। एक यूजर ने कहा कि, 'इसी वजह से हमने बड़े-बड़े आवासीय परिसरों से दूर रहने का फैसला किया है। हमें 20 फ्लैटों वाला एक अलग अपार्टमेंट मिला है। उनमें से ज्यादातर में अविवाहित लोग रहते हैं। पिछले 3 सालों से हम शांति से रह रहे हैं।' 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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