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भारत-पाकिस्तान विभाजन के 78 साल बाद दो बुजुर्ग दोस्तों का रीयूनियन, Video देखकर इमोशनल हुए यूजर्स

Viral Video : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में भारत-पाकिस्तान विभाजन के 78 साल बाद दो बुजुर्ग दोस्तों का रीयूनियन दिखाया गया है।

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Image Source : IG/@LOVELY_SINGH9213 दोस्तों के रीयूनियन का वीडियो वायरल।

Viral Video : सोशल मीडिया की दुनिया में वायरल हुए एक वीडियो ने लोगों को इमोशनल कर दिया है। इस वीडियो में 78 साल बाद दो बुजुर्ग पुरुषों का भावुक मिलन दिखाया गया है। वीडियो की शुरुआत में दोनों पुरुष एक-दूसरे के सामने चुपचाप खड़े हैं और दशकों बाद एक-दूसरे के परिचित चेहरों को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ देर रुकने के बाद दोनों आदमी आगे बढ़ते हैं और एक-दूसरे को कसकर गले लगा लेते हैं। यह भावुक क्षण कुछ सेकंड तक जारी रहता है, जबकि आसपास के लोग चुपचाप देखते रहते हैं।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर lovely_singh9213 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में बातचीत के दौरान उनमें से एक व्यक्ति पुरानी यादें ताजा करता है और गुरदेव सिंह और रणजीत सिंह जैसे नामों का जिक्र करता है। वह कहता है कि उन्होंने बचपन में साथ-साथ पढ़ाई की थी और उन्हें साथ बिताए पल याद हैं। उनकी बातचीत वीडियो को ऑनलाइन देख रहे दर्शकों के लिए इस पुनर्मिलन को और भी भावुक बना देती है। इस वीडियो में मुख्य रूप से लंबे समय बाद दोबारा मिलने पर दोनों पुरुषों की प्रतिक्रियाएं, भाव और साझा की गई यादें कैद हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए इस पल को भावुक और दिल को छू लेने वाला बताया है।   

यूजर्स हुए इमोशनल 

इस वीडियो को देखने के बाद कई यूजर्स ने लगभग आठ दशकों के अलगाव के बाद भी मजबूत बनी हुई दोस्ती पर प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि, 'उनका दोबारा मिलना तय था।' दूसरे ने लिखा कि, 'प्यार और दोस्ती का कोई धर्म नहीं होता।' तीसरे ने लिखा कि, 'मेरे माता-पिता 2005 में पाकिस्तान गए थे, अपने उन पड़ोसियों के साथ रहने के लिए जो 1947 में मेरी मां का गांव छोड़कर चले गए थे। हम सिख हैं, वे मुसलमान थे... लेकिन मेरे माता-पिता उन्हें परिवार का हिस्सा मानते थे।' एक और यूजर ने लिखा कि, 'यह मुझे मेरी मां की याद दिलाता है। उन्होंने कहा था कि हम सब एक साथ रहते और प्यार करते थे। वह अमृतसर से लाहौर आई एक मुस्लिम शरणार्थी थीं, लेकिन उनका दिल पुराने भारत के साथ ही रहा।' एक अन्य ने लिखा कि, 'मेरे पिताजी ने विभाजन के दौरान कई दोस्तों को खो दिया था; वे इस बारे में बड़े दुख से बात करते थे।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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