Ukrainian Women Video : सोशल मीडिया इन दिनों एक दिलचस्प वीडियो वायरल रहा है, जिसमें यूक्रेन की रहने वाली सैंड्रा ऑन ने देश की तेज डिलीवरी सेवाओं की अविश्वसनीय गति की प्रशंसा करते हुए अपना वीडियो वायरल कर दिया है। इंस्टाग्राम पोस्ट में, सैंड्रा ऑन ने आश्चर्य व्यक्त किया कि किराने का सामान और घरेलू जरूरत की चीज़ें कुछ ही मिनटों में उनके घर तक पहुंच जाती हैं। उन्होंने इस तेजं सेवा की तुलना यूरोप से की, जहां सामान्य डिलीवरी में अक्सर घंटों लग जाते हैं। सैंड्रा ने डिलीवरी मॉडल के प्रोसेस को समझने के बाद कहा कि, ये सोचते-सोचते उनका शेड्यूल खाली हो गया, जिससे उन्हें जीवन में वास्तव में मायने रखने वाली चीजों के लिए अधिक समय देने की अनुमति मिली। उनका
इंस्टाग्राम पर वीडियो हो वायरल
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @dra.sandraa नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस वीडियो में महिला ने बताया कि, 'चलिए भारत से शुरू करते हैं। डिलीवरी का समय, 6 मिनट। सिर्फ छह मिनट। दिल्ली में। उदाहरण के लिए: दिल्ली के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में बिना ट्रैफिक के भी 2-3 घंटे लगते हैं। और ट्रैफिक के साथ तो यह और भी लंबा सफर हो जाता है। मुझे अब भी समझ नहीं आता कि वे यह कैसे करते हैं। किराने का सामान, घरेलू सामान, 10 मिनट से भी कम समय में। मैं मजाक नहीं कर रही।'
शेयर किया अपना एक्सपीरिएंस
सैंड्रा ने कहा, 'मैं खाना बना रही थी और मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास एक सामग्री कम है। मैंने तुरंत उसे ऑर्डर किया और वह मेरे जरूरत पड़ने से पहले ही आ गई। मुझे रुकना नहीं पड़ा। मेरा ध्यान कहीं नहीं भटका। पूरी प्रक्रिया चलती रही। मैं यूरोप में 8 साल रही। वहां डिलीवरी में कम से कम 20-30 मिनट लगते हैं। और वो भी किराने के सामान के लिए! ठीक है, कीव बहुत बड़ा शहर है, मैं समझती हूं। लेकिन वारसॉ (पोलैंड का शहर) जितना बड़ा नहीं है, तो फिर बहाना क्या? और डिलीवरी का शुल्क? उसके बारे में तो बात ही मत करो। यूरोप में इतना लंबा इंतजार करना पड़ता है कि मैं अक्सर उठकर खुद दुकान चली जाती हूं। कम से कम मेरे कुछ कदम तो चल जाते हैं और शरीर थोड़ा हिलता-डुलता है। लेकिन भारत में बिल्कुल उल्टा है, यहां डिलीवरी इतनी सुविधाजनक है कि मैं अब घर से मुश्किल से ही बाहर निकलती हूं।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो पर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने कहा, 'डिलीवरी का समय इस बात पर निर्भर करता है कि स्टोर कितना पास है। डिलीवरी ड्राइवर की स्पीड मायने नहीं रखती।' दूसरे यूजर ने कहा, 'मैं कनाडा में रहता हूं। अगर मुझे ऑर्डर करने के उसी दिन किराने का सामान मिल जाता है तो मैं खुश हूं।' तीसरे ने कहा कि, 'लॉजिस्टिक्स ऑप्टिमाइजेशन के माध्यम से इसका समाधान हो गया है। ब्लिंकइट जैसी क्विक-कॉमर्स कंपनियां माइक्रो-वेयरहाउस/डार्क स्टोर बनाती हैं ताकि अधिकांश सोसाइटियां और घर लगभग 10 मिनट की डिलीवरी दूरी के भीतर हों। इसलिए दिल्ली जैसे शहर में भी, डिलीवरी पार्टनर आमतौर पर दूर से नहीं आता, ऑर्डर पास के ही वेयरहाउस से आता है।' चौथे ने कहा कि, 'सच कहूं तो, मुझे नहीं पता कि मैं ब्लिंकइट या इंस्टामार्ट के बिना कैसे रहता था। घर पर, किराने का सामान पहुंचाने वाली किसी भी सेवा में कम से कम 1.5 घंटे लगते हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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