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राजधानी एक्सप्रेस के नाम में 'राजधानी' का क्या मतलब है? आखिर क्यों पड़ी इसकी जरूरत, जानिए रोचक तथ्य

Railway Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने कई तरह की ट्रेनों से जुड़े रोचक तथ्य पढ़े और देखे होंगे। मगर, आज हम आपको बताएंगे कि राजधानी एक्सप्रेस के नाम में 'राजधानी' का क्या मतलब है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी ?

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Image Source : INDIANRAILINFO राजधानी एक्सप्रेस।

Railway Interesting Facts : भारतीय रेलवे के गौरवशाली इतिहास में राजधानी एक्सप्रेस एक मील का पत्थर है। ये ट्रेनें देश की राजधानी नई दिल्ली को विभिन्न राज्यों की राजधानियों या प्रमुख शहरों से जोड़ती हैं। यही वजह है कि इन्हें 'राजधानी एक्सप्रेस' भी कहा जाता है। राजधानी एक्सप्रेस ने न सिर्फ यात्रा का समय कम किया, बल्कि भारतीय रेलवे को आधुनिकता की ओर ले गई। यह ट्रेनें व्यस्त कारोबारी, सरकारी अधिकारियों और आम यात्रियों की पहली पसंद बनीं। आज भी ये 'किंग ऑफ ट्रेन' का दर्जा रखती हैं। वंदे भारत जैसी नई ट्रेनों के आने के बावजूद राजधानी अपनी जगह बनाए हुए है।

पहली राजधानी एक्सप्रेस कब चलाई गई 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली राजधानी एक्सप्रेस 03 मार्च, 1969 को रवाना हुई थी। दिल्ली से हावड़ा (कोलकाता) रूट पर चली इस ट्रेन में सिर्फ 9 कोच थे। 1450 किलोमीटर की दूरी को यह ट्रेन मात्र 17 घंटे 20 मिनट में तय करती थी, जो उस समय की अन्य ट्रेनों से काफी कम था। यह भारत की पहली फुल एयर-कंडीशंड एक्सप्रेस ट्रेन भी थी। शुरू में डीजल लोकोमोटिव (WDM-4) से चलाई जाती थी। 1972 में मुंबई-नई दिल्ली राजधानी शुरू हुई। धीरे-धीरे अन्य शहरों बेंगलुरु, चेन्नई, भुवनेश्वर, पटना आदि को जोड़ा गया। आज 26 से ज्यादा राजधानी एक्सप्रेस चल रही हैं, जिनमें कई तेजस राजधानी भी शामिल हैं।

आखिर क्यों पड़ी राजधानी एक्सप्रेस की जरूरत

1960 के दशक में भारतीय रेलवे की औसत गति मात्र 96 किमी/घंटा थी। यात्री ट्रेनों को तेज बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने अध्ययन शुरू किया। लक्ष्य था– पहले चरण में 120 किमी/घंटा और अंततः 160 किमी/घंटा। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने 1962 से काम शुरू किया। 1967 में फील्ड ट्रायल्स हुए। 19 फरवरी 1969 को रेल बजट में इस नई हाई-स्पीड ट्रेन की घोषणा की गई। 

राजधानी ट्रेन यात्रियों की पहली पसंद क्यों है 

गौरतलब है कि, राजधानी ट्रेनों को रेल नेटवर्क पर सबसे ऊंची प्राथमिकता मिलती है। ये पूरी तरह एयर-कंडीशंड होती हैं। मसलन- AC फर्स्ट, टू-टियर और थ्री-टियर। इसके अलावा कम स्टॉपेज, बेहतर सुविधाएं (भोजन, वाई-फाई, पावर सॉकेट) और डायनामिक प्राइसिंग इनकी खासियत है। बता दें कि, LHB कोच और आधुनिक WAP-7, WAP-5 लोकोमोटिव अब इनकी रफ्तार बढ़ाते हैं जिसमें इनकी स्पीड अधिकतम 130 किमी/घंटा होती है। यदि आपको नहीं पता है तो बता दें कि मुंबई राजधानी (12951) औसतन सबसे तेज मानी जाती है। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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