किस देश में पटरी से लटककर चलती है ट्रेन, मैकेनिज्म देख शॉक्ड रह जाते हैं लोग; समझें इसकी इंजीनियरिंग
सोशल मीडिया पर आपने अलग-अलग देशों की ट्रेन व्यवस्था से जुड़े फैक्ट्स पढ़े ही होंगे। मगर, क्या आपको पता है कि, किस देश में ट्रेन पटरी से लटककर चलती है।

दुनिया भर के विभिन्न देशों में लोगों को कुछ न कुछ ऐसा मिल ही जाता है जो कि अद्भुत इंजीनियरिंग और कौशल का शानदार नमूना होता है। फिर चाहे वो असाधारण पुल, सुरंग, इमारत या ट्रेन ही क्यों न हो। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कई वीडियोज में आपको इन देशों के अजब-गजब उदाहरण देखने को मिल ही जाते हैं। जापान, जर्मनी और चीन ऐसे देश हैं, जहां पर ट्रेन का एक ऐसा आधुनिक और अनोखा सिस्टम तैयार किया गया है जिसके तहत ट्रेन पटरी से नीचे की ओर लटककर चलती है। इसका मैकेनिज्म इतना शानदार है कि इसे पहली बार देखने वाले कुछ पल के लिए शॉक्ड हो जाते हैं।
हैंगिंग रेल सिस्टम के बारे में जानें
सबसे पहले तो आपको बता दें कि, पटरी से नीचे लटककर चलने वाली व्यवस्था को 'सस्पेंशन रेलवे सिस्टम' कहते हैं। इसे 'हैंगिंग रेलवे' या 'सस्पेंडेड मोनोरेल' के नाम से भी जाना जाता है। ये परिवाहन की ऐसी प्रणालियां हैं जहां ट्रेन जमीन से ऊपर उठे हुए ट्रैक से लटकी रहती है जिनमें बीम या कुछ एंगल्स के सपोर्ट से चलती है।
किन देशों में है ये सिस्टम
सस्पेंशन रेलवे सिस्टम दुनिया के तीन देशों में मौजूद है। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त कर चुके होने के कारण जापान को हैंगिंग रेल सिस्टम वाला इकलौता देश समझ लिया जाता है जबकि, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आइए जानते हैं किन तीन देशों में ये सिस्टम है:
- जापान
जापान की चिबा अर्बन मोनोरेल वर्ल्ड की सबसे लंबी सस्पेंशन मोनोरल है। इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। ये ट्रेन पटरी से नीचे की ओर लटकते हुए चलती है और नीचे का नजारा स्पष्ट दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त जापान में चलने वाली 'शोनान मोनोरेल' भी इसी टेक्निक प काम करती है। फेसबुक पर @InterestingEngineering नामक हैंडल से इसका एक वीडियो भी शेयर किया गया है।
- जर्मनी
जापान से भी पहले सस्पेंशन रेलवे सिस्टम जर्मनी में संचालित हो रही है। जर्मनी के वुपर्टल शहर में चलने वाली सस्पेंशन रेल विश्व में सबसे पुरानी इलेक्ट्रिक हैंगिंग रेल प्रणानी है जो तकरीबन 1901 से निरंतर संचालित हो रही है।
- चीन
चीन ने भी हाल ही में इस टेक्निक को अपनाया है। यहां पर वुहान में अत्याधुनिक कॉमर्शियल मोनोरल चलाई जा रही है जिसके फर्श ट्रांसपेरेंट हैं।
हैंगिंग रेलवे सिस्टम के क्या फायदे हैं
- सड़क पर कम से कम ट्रैफिक
- सुरंग, पुल, नदियां, घाटी को आसानी से क्रॉस करना
- ऊंचे ट्रैक होने के कारण पैदल यात्रियों को वाहन से टक्कर खतरा कम
- आकर्षक होने के कारण टूरिस्ट की संख्या में इजाफा
- नॉर्मल परिवहन साधनों की तुलना में अद्वितीय एक्पीरिएंस प्रदान करना
- कम से कम फ्रिक्शन और कंपन के कारण शांत होना
कैसी होती है पटरी से लटककर चलने वाली ट्रेन
इंस्टाग्राम @thefilmychhora_ नामक हैंडल से शेयर किए वीडियो में भारतीय शख्स ने जापान की ट्रेन का अंदर से नजारा दिखाया। गौरतलब है कि, इस सिस्टम के ट्रैक में एक पतली बीम संरचना होती है जो छोटे सेक्शन वाले खंभों द्वारा हवा में समर्थित होती है और ये Electric Traction पर निर्भर करती है। इसका निर्माण लचीला है, इसमें दो से छह डिब्बे होते हैं। ट्रेन की अधिकतम क्षमता 20,000 यात्री प्रति घंटा है और यह 80 किमी/घंटा की अधिकतम गति प्राप्त कर सकती है। ट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें चालक पहिए और मार्गदर्शक पहिए लगे होते हैं। चालक पहियों की स्थिति और पटरी के नीचे बनी रेल पटरी की संरचना में अंतर के आधार पर विभाजित किया गया है। ट्रेन का डिजाइन ढलान और छोटे त्रिज्या वाले कर्व्स वाली लाइनों के लिए उपयुक्त है।
सस्पेंशन रेलवे सिस्टम कैसे काम करता है
इस सिस्टम में ट्रेन ड्राइविंग और गाइडिंग दोनों के लिए रबर के टायरों का उपयोग करती है, जिसमें ड्राइविंग टायर न केवल ट्रेन के भार को सहारा देते हैं बल्कि प्राथमिक सस्पेंशन के रूप में कंपन और शोर को भी कम करते हैं। इस ट्रेन की बोगी ट्रैक बीम के अंदर स्थित होती है, जिससे पटरी से उतरने का खतरा और ट्रेन संचालन के दौरान मौसम की स्थितियों का प्रभाव टल जाता है। इन ट्रेनों को चलाने के लिए बने पुल में खुले तल वाले ट्रैक बीम, छोटे आकार के सहायक पिलर और पाइल नींव होते हैं। इस पुल के निर्माण के लिए बहुत कम जमीन की आवश्यकता होती है, इसलिए मौजूदा जमीनी यातायात पर इसका लगभग कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
गौरतलब है कि, इससे पहले हमने आपको रेलवे स्टेशन पर 24 बजने वाली घड़ी यूज करने की वजह के बारे में बताया था।
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